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अकबरनगर। श्रावणी मेला जैसे पवित्र अवसर को लेकर जहां एक ओर जिला प्रशासन और रेलवे विभाग श्रद्धालुओं की सुविधा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं अकबरनगर रेलवे स्टेशन की जमीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह झूठा साबित कर रही है। स्टेशन की वर्तमान स्थिति बेहद दयनीय है, जहां न तो साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था है, न पेयजल, शौचालय, रौशनी, मार्गदर्शन केंद्र और न ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।

हर साल सावन मास में जिले के विभिन्न इलाकों से हजारों श्रद्धालु अकबरनगर रेलवे स्टेशन के रास्ते देवघर की ओर प्रस्थान करते हैं, लेकिन इस बार उन्हें भारी अव्यवस्था से गुजरना पड़ सकता है। भागलपुर-अजगैवीनाथ धाम के बीच स्थित यह एक प्रमुख स्टेशन है, फिर भी यहां श्रद्धालुओं के बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। प्लेटफार्म पर लगे नल से गंदा पानी बह रहा है, प्याऊ में भी गंदगी जमा है और छत से बारिश का पानी टपकता है, जिससे यात्री भीगते नजर आते हैं।

शौचालयों की हालत तो और भी खराब है। बदबू, गंदगी और साफ-सफाई की भारी कमी के कारण इनका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। प्लेटफार्म एक और स्टेशन के बाहर स्थित शौचालयों में ताले लगे हैं। महिला कांवरियों के लिए कोई अलग सुविधा नहीं दी गई है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। रौशनी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और थकावट भरी यात्रा के बाद विश्राम के लिए कोई इंतजाम नहीं है। फर्श की टाइलें टूटी पड़ी हैं, जिससे फिसलने का खतरा भी बना रहता है।

मूलभूत सुविधाओं को लेकर उठी मांग

स्थानीय सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन और रेलवे विभाग से अपील की है कि श्रावणी मेला से पहले स्टेशन की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। श्रद्धालुओं की संख्या, उनकी आस्था और यात्रा की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्टेशन पर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य केंद्र, लाइटें और मार्गदर्शन काउंटर जैसी न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

इसके साथ ही स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि श्रावणी मेला जैसे विशेष अवसर पर भी अकबरनगर स्टेशन पर महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं हो रहा है। फरक्का एक्सप्रेस, मालदा-पटना इंटरसिटी, पटना-दुमका, बांका-राजेंद्रनगर, जयनगर-भागलपुर और रांची-गोड्डा एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है।

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि मेला अवधि में इन ट्रेनों का अस्थायी ठहराव सुनिश्चित किया जाए, ताकि कांवरियों और आम यात्रियों को राहत मिल सके। श्रावणी मेला के दौरान स्टेशन की बदहाल स्थिति यदि ऐसे ही बनी रही, तो यह न केवल श्रद्धालुओं की आस्था पर आघात होगा, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करेगा।

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