


नवगछिया। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के निर्देशन में नवगछिया के मदन अहल्या महिला महाविद्यालय में अंतर महाविद्यालय हैंडबॉल टूर्नामेंट का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का शुभारंभ कुलगीत के सामूहिक गायन के साथ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में उत्साह और गरिमा का संचार हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के संयोजक डॉ. अतुल चंद्र घोष और क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल उपस्थित रहे। महाविद्यालय की ओर से अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर किया गया।
टूर्नामेंट में पहला मुकाबला मदन अहल्या महिला महाविद्यालय और सुन्दरवती महिला महाविद्यालय के बीच खेला गया। दोनों टीमों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, लेकिन अंततः मदन अहल्या महिला महाविद्यालय की टीम ने विजय प्राप्त की। दूसरे मुकाबले में एस.एस.वी. कॉलेज, कहलगांव ने मारवाड़ी महाविद्यालय को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल मुकाबला मदन अहल्या महिला महाविद्यालय और एस.एस.वी. कॉलेज, कहलगांव के बीच खेला गया, जो अत्यंत रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला रहा। दोनों टीमों ने शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन किया, लेकिन अंततः एस.एस.वी. कॉलेज, कहलगांव की टीम विजेता घोषित हुई।
मुख्य अतिथि डॉ. अतुल चंद्र घोष ने अपने संबोधन में कहा कि खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम हैं। इससे अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और मानसिक दृढ़ता का विकास होता है। वहीं, क्रीड़ा परिषद अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर खेलों को निरंतर बढ़ावा दिया जाएगा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी और प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अवधेश रजक ने सभी अतिथियों, खिलाड़ियों, निर्णायकों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में इस प्रकार के खेल आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने का आश्वासन दिया।
इस आयोजन की सफलता में महाविद्यालय के शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, खेल प्रभारी और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके समर्पण और मेहनत से ही टूर्नामेंट इतनी व्यवस्थित और आकर्षक रूप से संपन्न हो सका। इस प्रकार नवगछिया में आयोजित यह अंतर महाविद्यालय हैंडबॉल टूर्नामेंट विद्यार्थियों में खेलों के प्रति उत्साह, टीम भावना और प्रतिस्पर्धात्मक कौशल को बढ़ावा देने के साथ-साथ विश्वविद्यालय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं की महत्ता को भी उजागर करने वाला आयोजन साबित हुआ।












