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भागलपुर। इंसानों और कुत्तों के बीच का रिश्ता दुनिया का सबसे अनूठा बंधन माना जाता है। इसी बंधन का सम्मान करने और लोगों को कुत्तों को गोद लेने व उनकी देखभाल के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से इंटरनेशनल डॉग डे मनाया जाता है। इस दिन लोगों को जागरूक किया जाता है कि कुत्तों को भी रहने के लिए सही वातावरण और खान-पान की सुविधा मिलनी चाहिए।

भारत में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद चर्चाओं का दौर तेज हुआ है। इसी बीच भागलपुर के मशाकचक स्थित सतीश चंद्र लेन के निवासी सौरभ बनर्जी उर्फ बाबई दादा चर्चा का विषय बने हुए हैं। सौरभ बनर्जी पिछले चार दशक से आवारा कुत्तों की सेवा में लगे हुए हैं। वे अपनी कमाई का 70 प्रतिशत हिस्सा कुत्तों के भोजन और दवाई पर खर्च करते हैं, वहीं अपने जीवन का लगभग 80 प्रतिशत समय इनकी देखभाल में समर्पित कर चुके हैं। उनका घर आज कुत्तों का फीडिंग ज़ोन बन चुका है, जहां दर्जनों आवारा कुत्ते बिना रोक-टोक आते-जाते रहते हैं।

सौरभ ने टीएनबी कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की है और पहले प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाते थे। कोरोना काल के बाद पढ़ाना छोड़ दिया, जिससे आर्थिक परेशानी बढ़ी, लेकिन उनके रिश्तेदारों ने सहयोग किया। उनकी पुपरी बहन चंदना बनर्जी (आरबीआई से रिटायर्ड जनरल मैनेजर), चचेरी बहन और भाई, फुफेरा भाई डॉक्टर कमल मुखर्जी हर माह आर्थिक मदद भेजते हैं। इन्हीं पैसों से वे घर और कुत्तों का खर्च उठाते हैं। सौरभ अब तक करीब 300 से अधिक कुत्तों का पालन-पोषण कर चुके हैं।

सौरभ कहते हैं कि उनकी कोई संतान नहीं है, कुत्ते ही उनके संतान समान हैं। जब किसी कुत्ते की मृत्यु हो जाती है, तो वे उसे दफनाते हैं और शोक में तीन दिन तक हिंदू रीति-रिवाज से जीवनचर्या बदल देते हैं। वर्तमान में उनके घर में 25 कुत्ते हैं। उनकी पत्नी पहले बनर्जी भी सुबह-सुबह उठकर दूध, चावल-दाल बनाकर कुत्तों को खिलाती हैं। हफ्ते में एक-दो दिन कुत्तों को अंडा भी दिया जाता है।

तिलकामांझी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर रतना मुखर्जी भी उन्हें सहयोग करती हैं और महीने में 35 से 40 किलो चावल उपलब्ध कराती हैं। पड़ोसी केका भादुड़ी बताती हैं कि वे पिछले 40 सालों से देख रही हैं कि सौरभ बनर्जी घायल और बीमार कुत्तों को घर लाकर इलाज करते हैं और उनकी सेवा करते हैं। उनके मुताबिक सौरभ का कुत्तों के प्रति भाव बिल्कुल अलग और अद्वितीय है।

सौरभ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन करते हैं और मानते हैं कि जैसे इंसान को जीने का अधिकार है, वैसे ही कुत्तों को भी है। हां, रेबीज पीड़ित कुत्तों से बचाव आवश्यक है। वे कहते हैं कि कुत्ते इंसानों के सबसे वफादार दोस्त हैं और उनकी भावनाओं को समझते हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया है कि नगर निकाय हर वार्ड में कुत्तों के लिए फीडिंग पॉइंट बनाएं और आक्रामक व रेबीज संक्रमित कुत्तों को अलग रखा जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्था या व्यक्ति आदेश का उल्लंघन करेगा तो कार्रवाई होगी।

भागलपुर में हाल के दिनों में पागल कुत्तों के हमलों से कई लोग घायल हुए हैं। नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह आवारा कुत्तों की देखरेख और प्रबंधन सही तरीके से करे, लेकिन अभी तक यह काम प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है। निगम ने डॉग कंपाउंड प्रोजेक्ट के लिए हेल्पलाइन नंबर 6005185660 जारी किया है।

सौरभ बनर्जी मूल रूप से बंगाल के हुगली जिले के रहने वाले हैं। उनके दादा नारायण दास 1935 में भागलपुर आए थे और टीएनबी कॉलेज में गणित के प्रोफेसर थे। उनके पिता सच्ची दुलाल बनर्जी जेल डॉक्टर थे। सौरभ पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके छोटे भाई का निधन गंभीर बीमारी से हो चुका है।

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