



भागलपुर। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मंगलवार को शहर के ऐतिहासिक बाबा बूढ़ानाथ मंदिर प्रांगण में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता जानकी का पावन विवाहोत्सव बड़े ही विधि-विधान और भव्यता के साथ संपन्न किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। जय-जयकार, मंगलगीत और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने दिव्य क्षणों के साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।

विवाह पंचमी की यह तिथि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वह पावन दिवस मानी जाती है, जब त्रेतायुग में श्रीराम और सीता का विवाह हुआ था। माना जाता है कि यह विवाह केवल मानवीय संबंध नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, प्रेम और त्याग की सर्वोच्च स्थापना का प्रतीक है। इस दिन किए गए पूजन-अनुष्ठान से दाम्पत्य सुख, विवाह-सिद्धि, गृहस्थ-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होने का विश्वास है।

इस वर्ष मंगलवार को पड़े शुभ योग के कारण मंदिर में भक्तों की भीड़ दिनभर उमड़ती रही। पुरोहितों द्वारा परंपरागत रीति से मंगलाष्टक, जयमाल, फेरे और कन्यादान की प्रतीकात्मक विधियां संपन्न कराई गईं। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर प्रांगण ‘सियावर रामचंद्र की जय’ और ‘जय सियामाईया की’ के जयघोष से गूंजता रहा।
मंदिर समिति, सेवकों और स्थानीय लोगों ने विवाहोत्सव की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाई। आकर्षक सजावट, भक्ति संगीत, प्रसाद वितरण और रोशनी से पूरा वातावरण दिव्यमय हो उठा। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम–सीता के पवित्र दांपत्य से प्रेरणा लेते हुए अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण और मर्यादा बनाए रखने का संकल्प लिया।
















