



भागलपुर। बिहार विधानसभा में राज्य के वित्त मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव द्वारा पेश बजट भाषण अब तक के इतिहास का सबसे संक्षिप्त भाषण माना जा रहा है। बजट में निर्धारित आय और व्यय में पिछले कई वर्षों से भारी असमानता दिखाई दे रही है। राज्य को प्राप्त कुल राजस्व और व्यय की असमानता यह दर्शाती है कि बिहार का बजट सरकार द्वारा अनुमानित आंकड़ों से कहीं अधिक है। यदि राज्य के कोषीय घाटे पर ध्यान दिया जाए, तो स्पष्ट होता है कि बिहार वित्तीय रूप से धीरे-धीरे दिवालियेपन की ओर बढ़ रहा है।
भागलपुर के पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने इस बजट पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि बिहार सरकार का बजट सिस्टम पूरी तरह फेल है। उन्होंने कहा, “एक वर्ष का बजट भी सही नहीं बनता। अगर एक लाइन में कहें तो यह लोगों को बरगलाने वाला बजट है। यह तीन वर्षों के बजट मिलान से स्पष्ट हो जाएगा।”

अजीत शर्मा ने बजट के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2024-25 में कुल व्यय लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपये अनुमानित था, जो पुनरीक्षित होकर 3,49,817 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस दौरान राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) 3% के बजाय 82,477 करोड़ रुपये यानी लगभग 9% तक बढ़ गया। 2025-26 में बजट का आकार 3,17,000 करोड़ रुपये रखा गया था, जो संशोधित होकर 4,23,284 करोड़ रुपये हो गया। राजकोषीय घाटा 3% (32,718 करोड़) रखा गया था, लेकिन यह बढ़कर 1,34,371 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

वित्तीय वर्ष 2026-27 का कुल व्यय 3,53,045 करोड़ रुपये का रखा गया है, जिसमें राजस्व व्यय 2,84,133 करोड़ रुपये यानी लगभग सारा राजस्व व्यय में चला गया और विकास कार्यों के लिए बहुत कम बचा। पूँजीगत व्यय केवल 63,455 करोड़ रुपये यानी कुल बजट का 18% ही है। राजकोषीय घाटे का दावा 2.99% GSDP का किया गया है, लेकिन पिछले पैटर्न के अनुसार यह 15-20% तक बढ़ सकता है।

अजीत शर्मा ने कहा कि यह बजट विकास के लिए नहीं, बल्कि घाटे के लिए है। बजट में हर साल पूँजीगत व्यय बढ़ाने का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविकता में राजस्व व्यय (वेतन, पेंशन, सब्सिडी) में फँसा हुआ है। बिहार की अपनी राजस्व क्षमता कमजोर है, टैक्स संग्रह बहुत कम है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र से मिलने वाले सहायक अनुदान में कमी आई है (54,757 करोड़ से घटकर 51,895 करोड़) जबकि दोनों सरकारें, राज्य और केंद्र, एनडीए की हैं।
पूर्व विधायक ने कहा कि पूरे बजट की एक ही कहानी है – केंद्र पर निर्भरता। 80% से अधिक बजट केंद्र सरकार पर आधारित है और राज्य अपनी कमाई केवल 20% के आसपास जुटा पा रहा है।
















