



भागलपुर: जिले के पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत टड़वा गांव में मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे एक दर्दनाक हादसा होते-होते टल गया। टड़वा गांव निवासी सुमन कुमार की एक वर्षीय पुत्री अन्वी कुमारी खेलते-खेलते आंगन में रखी पानी से भरी बाल्टी में गिर गई। दुर्भाग्यवश, बच्ची का सिर बाल्टी में डूब गया और वह आवाज तक नहीं निकाल सकी।
परिजनों ने बताया कि बच्ची करीब दो-तीन मिनट तक बाल्टी में उल्टी अवस्था में पड़ी रही, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। तभी अन्वी की मां की नजर उस बाल्टी पर पड़ी और जैसे ही उन्होंने बच्ची को बाहर निकाला, पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग दौड़ पड़े, लेकिन सभी को लग रहा था कि अब मासूम अन्वी हमारे बीच नहीं रही।

लेकिन सुमन कुमार ने हार नहीं मानी। उन्होंने तुरंत अपनी बच्ची को अपने हाथों में लिया और उसके पेट को धीरे-धीरे दबाया, मुंह से सांस दी और CPR जैसा प्रयास किया। लगभग आधे घंटे के अथक प्रयास के बाद, बच्ची की धड़कन और सांस वापस लौटी। यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था। उस समय जो आंखें आंसुओं से भरी थीं, उनमें अब उम्मीद की चमक लौट आई थी।
बच्ची की स्थिति को गंभीर देखकर उसे तुरंत पीरपैंती रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां तैनात डॉ. नीरज राज ने इमरजेंसी दवाएं दीं और इलाज शुरू किया। इसके बाद बच्ची को गंभीर हालत में मायागंज मेडिकल कॉलेज, भागलपुर रेफर कर दिया गया।

वहां के डॉक्टरों की विशेष टीम ने सारी रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि अन्वी कुमारी अब खतरे से बाहर है। चार-पाँच दिनों तक विशेष उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी। राहत की बात यह है कि मासूम अन्वी होश में आ चुकी है और हल्के-हल्के खेलने भी लगी है। परिवार के लिए यह किसी नई जिंदगी के मिलने जैसा है।
सुमन कुमार की जिद और प्रेम ने जिस बच्ची की सांसें लगभग थम चुकी थीं, उसे फिर से जीवन दिया। गांव वाले इसे ईश्वर की करुणा और पिता की दृढ़ता का परिणाम मान रहे हैं। अन्वी अब केवल सुमन कुमार की बेटी नहीं, बल्कि पूरे गांव की दुआओं की जीती-जागती मिसाल बन गई है।













