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कलाकारों के लिए बेसिक आईटी प्रशिक्षण, ‘कला बाजार’ पर व्याख्यान एवं प्रतिभाओं का सम्मान

भागलपुर ।
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय वसंत पंचमी महोत्सव: वसंतोत्सव 2026 के तीसरे एवं अंतिम दिन 25 जनवरी 2026 को अंग संस्कृति भवन, भागलपुर संग्रहालय के प्रेक्षागृह में कलाकारों के लिए ‘बेसिक आईटी प्रशिक्षण कार्यशाला’, ‘कला बाजार’ विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम तथा समापन समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में कलाकारों के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बाल कलाकारों से लेकर वरिष्ठ कलाकारों तक को डिजिटल युग में अपनी कला को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने कलाकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी कला के प्रचार-प्रसार, ऑनलाइन आवेदन, ई-मेल के माध्यम से पत्राचार, पीडीएफ तैयार करना, क्यूआर कोड स्कैन करना, ऑनलाइन फॉर्म भरना सहित बिहार सरकार की विभिन्न सांस्कृतिक योजनाओं और देश की प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं की जानकारी पीपीटी प्रजेंटेशन के माध्यम से दी।
कार्यशाला के उपरांत सभी प्रतिभागियों को डायरी, पेन, बैग एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

दूसरे सत्र में भागलपुर संग्रहालय के प्रेक्षागृह में ‘कला बाजार’ जैसे समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मॉडरेटर की भूमिका जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने निभाई। व्याख्यान मंच पर शिक्षाविद राजीवकांत मिश्रा, डॉ. चंद्रेश तथा मंजूषा गुरु मनोज पंडित उपस्थित रहे।
डॉ. चंद्रेश ने रंगमंच एवं उससे जुड़ी विधाओं की वर्तमान बाजार मांग पर गंभीर चर्चा की। वहीं मनोज पंडित ने भागलपुर में मंजूषा कला की शुरुआत से लेकर वर्तमान शिखर तक की यात्रा साझा करते हुए लोक चित्रकला में नवाचार अपनाने पर बल दिया। वरिष्ठ शिक्षाविद राजीवकांत मिश्रा ने किशोर एवं युवाओं को अपनी कला के माध्यम से समाज और देश का नाम रोशन करने की प्रेरणा दी।

इसके पश्चात प्रदर्श कला प्रतियोगिता में शामिल सभी कलाकारों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। निर्णायक मंडल द्वारा चयनित उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले कलाकारों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
हारमोनियम वादन में वैभव, तबला वादन में अमन, सितार वादन में नमन, शास्त्रीय वादन में बेबो, आदित्य एवं देव, कथक नृत्य में दीक्षा एवं मृडानी, लोक गायन में दिलजीत, समरोज एवं सरगम ने उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किया।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने विशेष रूप से प्रतिभाशाली कलाकारों को वाद्य यंत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। बेबो को उत्कृष्ट गायन के लिए हारमोनियम तथा अमन को नाल वाद्य यंत्र प्रदान किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अमन ने कहा कि किसी सरकारी मंच से वाद्य यंत्र मिलना उनके लिए जीवन भर यादगार अनुभव रहेगा। वहीं बेबो ने इसे अपनी आवश्यकता बताते हुए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रदर्श कला प्रतियोगिता के निर्णायक सदस्य राय प्रवीर, मिथलेश कुमार, गोपाल कृष्ण मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। उपस्थित सभी वरिष्ठ कलाकारों एवं निर्णायक मंडल के सदस्यों ने कलाकारों को वाद्य यंत्र प्रदान करने की पहल की सराहना करते हुए इसे प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायी बताया।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सभी कलाकारों एवं अतिथियों ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया तथा इसके ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम का विधिवत समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

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