


भागलपुर : बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर में इस समय सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। शहर की वायु गुणवत्ता लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचती जा रही है। रविवार शाम रिकॉर्ड किए गए लाइव डेटा ने प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। महज 25 से 27 मिनट के भीतर वायु प्रदूषण में आई तेज बढ़ोतरी ने हालात की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
लाइव आंकड़ों के अनुसार, शाम 7 बजकर 06 मिनट पर भागलपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 359 दर्ज किया गया था, जो पहले से ही खतरनाक श्रेणी में था। इसके बाद शाम 7 बजकर 33 मिनट तक यह बढ़कर 446 तक पहुंच गया, जिसे अत्यंत खतरनाक या हैज़र्डस श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान प्रदूषण स्तर में लगभग 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हवा में मौजूद घातक सूक्ष्म कणों की बात करें तो PM2.5 का स्तर 298 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जो सामान्य मानक से कई गुना अधिक है। वहीं PM10 के स्तर में भी भारी इजाफा देखा गया है, जिससे लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्याएं होने लगी हैं।
डेटा यह भी दर्शाता है कि भागलपुर की स्थिति पूरे बिहार में सबसे खराब बनी हुई है। शाम 7 बजे यह शहर राज्य के औसत AQI से लगभग 1.2 गुना अधिक प्रदूषित था, जबकि रात होते-होते यह आंकड़ा 1.4 गुना यानी लगभग 40 प्रतिशत अधिक हो गया। इसका साफ मतलब है कि इस समय भागलपुर बिहार के सबसे प्रदूषित शहरों में शीर्ष पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में गैस चेंबर जैसे हालात बनने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सर्दियों के मौसम में विंटर स्मॉग और लो इन्वर्जन की स्थिति बन जाती है, जिसमें ठंडी और भारी हवा जमीन के पास ठहर जाती है। इससे धूल और धुएं के कण ऊपर नहीं जा पाते और हवा में ही फंसे रहते हैं। इसके अलावा शहर में चल रहे निर्माण कार्य, अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और सड़कों की धूल PM10 के स्तर को लगातार बढ़ा रहे हैं। भौगोलिक स्थिति भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। गंगा नदी के किनारे बसे होने के कारण नमी और धुंध का मिश्रण प्रदूषकों को शहर के ऊपर ही कैद कर लेता है।
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब AQI 400 के पार चला जाता है तो यह केवल बीमार या कमजोर लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी गंभीर खतरा बन जाता है। ऐसे हालात में सांस, फेफड़े और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बुजुर्गों, बच्चों और दमा या सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को सुबह और देर शाम घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। बाहर निकलना बेहद जरूरी हो तो केवल N95 या N99 मास्क का प्रयोग करें, क्योंकि साधारण कपड़े या सर्जिकल मास्क इन सूक्ष्म कणों को रोकने में सक्षम नहीं होते। घरों के अंदर खिड़की और दरवाजे बंद रखें और संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
भागलपुर में मौजूदा वायु प्रदूषण की स्थिति किसी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से कम नहीं मानी जा रही है। यदि समय रहते प्रदूषण नियंत्रण के सख्त और प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।













