



भागलपुर। जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रह रहे गरीब और वंचित परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और महिलाओं के सामाजिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से जीविका द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत ऐसे परिवारों की पहचान कर उन्हें जीविका के स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है, जो अब तक इस योजना से वंचित रह गए थे।
जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य कार्यालय के दिशा-निर्देश के आलोक में जन वितरण प्रणाली से लाभान्वित सभी परिवारों को स्वयं सहायता समूह से जोड़ने हेतु एक व्यापक घर-घर सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इस सर्वेक्षण के माध्यम से उन महिलाओं की पहचान की जा रही है, जो अब तक जीविका समूहों की सदस्य नहीं बनी हैं। चिन्हित महिलाओं को जागरूक कर उन्हें समूहों से जोड़ा जा रहा है।
इस अभियान की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल पिछले एक माह में ही जिले में 1188 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों के माध्यम से लगभग 13 हजार से अधिक नए परिवार जीविका से जुड़े हैं। खास बात यह है कि इस अभियान में महादलित टोलों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन टोलों में भी अभियान चलाकर एक हजार से अधिक नए सदस्यों को चिन्हित कर जीविका समूहों से जोड़ा गया है।
जीविका समूहों के माध्यम से महिलाओं को न सिर्फ आपसी सहयोग और बचत की आदतें सिखाई जा रही हैं, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया जा रहा है। महिला सदस्य छोटे पैमाने पर स्वरोजगार के लिए ऋण ले रही हैं, प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और विभिन्न उत्पादों के निर्माण और बिक्री में भी सक्रिय हो रही हैं।
जिला परियोजना प्रबंधक ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पूरे बिहार में 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जाए। इसी दिशा में भागलपुर जिले में अब तक कुल 28,509 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इन समूहों से तकरीबन 3 लाख 45 हजार परिवार जुड़े हुए हैं।
समूहों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 10 से 15 स्वयं सहायता समूहों को मिलाकर एक ग्राम संगठन का गठन किया जाता है। जिले में अब तक 1970 ग्राम संगठन और 49 संकुल स्तरीय संघ का गठन किया जा चुका है। इन संगठनों के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व क्षमता, वित्तीय साक्षरता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

सरकार इन समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए स्वरोजगार, प्रशिक्षण, बैंकिंग सुविधा, स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी योजनाएं संचालित कर रही है। यही कारण है कि आज जीविका समूहों की महिलाएं ना केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं, बल्कि समाज में भी एक सशक्त भूमिका निभा रही हैं।
इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी गरीब परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे और सभी को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सके।













