



भागलपुर। मोहर्रम के नवें दिन यानी 5 जुलाई को सुबह से ही भागलपुर के विभिन्न गांवों और मोहल्लों से ताजियों का जुलूस निकाला गया, जो अपने-अपने इलाकों से निकलकर किला घाट स्थित इमामबाड़ा पहुंचा। वहां दुआ-फातिहा अदा कर जुलूस पुनः अपने स्थानों की ओर लौट गया। यह सिलसिला सुबह से लेकर शाम 4 बजे तक जारी रहा।
सुबह 11 बजे से जुलूसों का आगमन शुरू हुआ और अंतिम जुलूस 4 बजे किला घाट पहुंचा। जुलूस में मिर्गीयाचक, नाथनगर, जगतपुर, भीखनपुर, सबौर, हसनाबाद, साहिबगंज, कबीरपुर, इस्लामनगर, कबीरपुर पश्चिम टोला, खंजरपुर, मुस्तफापुर, मायागंज, चौका फतेहपुर, लोदीपुर पूरब टोला, आसनदपुर, बदरे आलमपुर, रकाबगंज और शाहजंगी से आए ताजिए शामिल थे।

जुलूस में मायागंज, मुस्तफापुर और चौका फतेहपुर के ताजिए विशेष रूप से संयमित, भव्य और आकर्षक माने गए। जब्बारचक चौक, लाल खान दरगाह चौक, क्लिप लैंड रोड, वाजिद अली रोड और किला घाट पर विशेष मंच बनाकर श्रद्धालुओं को सेवा प्रदान की गई।
नगर निगम, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से समुचित व्यवस्था की गई थी, जिससे जुलूस में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हुई। रात्रिकालीन कार्यक्रम के अंतर्गत मियां साहब का जुलूस रात 1:35 बजे मियां साहब के मैदान से निकला, जो कोतवाली चौक होते हुए 2:35 बजे और किला घाट इमामबाड़ा से 3:35 बजे रिकाबगंज, एम.एम. कॉलेज समपार होकर शाहजंगी की ओर रवाना हुआ।
मोहर्रम की 10वीं और 11वीं तारीख को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जुलूसों का सिलसिला जारी रहेगा। आयोजन के दौरान सेंट्रल मोहर्रम कमेटी के संयोजक डॉ. फारूक अली के नेतृत्व में कमेटी के सदस्य एवं किलाघाट इंतजामिया कमेटी के कई पदाधिकारी तथा तातारपुर थाना के अधिकारी दल-बल के साथ अंत तक मौजूद रहे।

गौरतलब है कि मोहर्रम इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का पहला महीना होता है, जिसकी शुरुआत 622 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद के मक्का से मदीना हिजरत के बाद हुई थी। वर्तमान में हम 1447 हिजरी वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। मोहर्रम की 10वीं तारीख को कर्बला के मैदान में पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी, जिसे याद करते हुए यह जुलूस निकाला जाता है।














