



भागलपुर शहर के वृंदावन मैरिज हॉल में ‘बदलो बिहार, नई सरकार नागरिक अभियान’ के तहत एक अहम संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बिहार में बदलाव की जनभावना को स्वर देने और जनभागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
संगोष्ठी में सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक मोर्चे पर सक्रिय कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी के प्रपौत्र और प्रसिद्ध सामाजिक विचारक तुषार गांधी थे। उन्होंने अपने संबोधन में बिहार की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर गंभीर चर्चा करते हुए कहा कि आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी अगर आम नागरिक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और न्याय जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए जूझ रहा है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने गांधीवादी विचारधारा की पुनः स्थापना और सामाजिक न्याय पर आधारित राजनीति की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. सुनील (पूर्व विधायक एवं सांसद), समाजवादी चिंतक विजय प्रताप, गुड्डी शाह (युसूफ मेहर अली सेंटर, दिल्ली), और कुमार चंद्र माली (सामाजिक कार्यकर्ता, झारखंड) ने भी विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने नागरिक चेतना, राजनीतिक जागरूकता और वैकल्पिक नेतृत्व की जरूरत को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक अमरनाथ भाई ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में सामाजिक आंदोलनों की ऐतिहासिक विरासत रही है और आज भी जन आंदोलनों के ज़रिये ही सार्थक परिवर्तन संभव है। उन्होंने युवाओं को वैकल्पिक राजनीति के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस संगोष्ठी का आयोजन कई सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से किया गया। प्रमुख आयोजकों में गंगा मुक्ति आंदोलन, सीएफडी, राज सेवा दल, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान, भारत जोड़ो अभियान, सर्वोदय मंडल, संघर्ष वाहिनी समिति, जल समिति और एकता रहें जैसे संगठन शामिल थे।
भागलपुर एवं आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, बुद्धिजीवी और जागरूक नागरिक इस कार्यक्रम में शामिल हुए। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य बिहार में वैकल्पिक राजनीति की नींव तैयार करना और जन सरोकारों पर आधारित शासन की सोच को आगे बढ़ाना था।
इस अवसर पर वक्ताओं ने एकमत से कहा कि अब जनता को केवल एक मतदाता नहीं, बल्कि बदलाव की निर्णायक शक्ति के रूप में उभरना होगा। यह संगोष्ठी जन-जागरण की दिशा में एक प्रभावशाली और सार्थक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।













