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भागलपुर में पिछले 27 वर्षों से अदालतों में चल रहा भूमि विवाद आखिरकार जमीन पर उतर आया। महात्मा गांधी रोड स्थित सिविल सर्जन परिसर में जब प्रशासन का पीला पंजा चला, तो पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। न्यायालय के आदेश के बाद दो बुलडोजर एक साथ चलाए गए और कुछ ही देर में पांच दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

कार्रवाई शुरू होते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया। कोई शटर गिराता दिखा तो कोई आनन-फानन में अपना सामान समेटता नजर आया। पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। कार्रवाई के दौरान न्यायालय के नाजिर, अधिवक्ता और दंडाधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते रहे।

इसी बीच सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने विधि-व्यवस्था की संभावित स्थिति को देखते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को फिलहाल 15 दिनों के लिए रोकने का निर्णय लिया।

सदर एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि प्रशासन को सूचना मिली थी कि कार्रवाई जारी रहने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। शांति बनाए रखने के उद्देश्य से यह अस्थायी रोक लगाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे न्यायालय से जो भी आदेश प्राप्त होगा, उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि यह विवाद वर्ष 1998 से न्यायालय में लंबित है। स्थानीय महिला आशा देवी ने वर्ष 2011 में निचली अदालत से यह मामला जीता था, जबकि वर्ष 2024 में अपील अदालत से भी उनके पक्ष में फैसला आया। इसके बाद न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, जिसके अनुपालन में यह कार्रवाई शुरू की गई।

मामले की जड़ वर्ष 1985 के सर्वे से जुड़ी बताई जा रही है, जब तत्कालीन सरकारी अमीन बैजनाथ गुप्ता द्वारा किए गए सर्वे में सिविल सर्जन परिसर के एक हिस्से को आशा देवी के नाम से दर्ज कर दिया गया था, जबकि खतियान के अनुसार यह जमीन सरकारी बताई जाती है। इस गड़बड़ी के उजागर होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने सरकारी अमीन को बर्खास्त कर दिया था।

इसके बाद वर्ष 1998 में मामला न्यायालय पहुंचा। सरकारी पक्ष की अपील निचली अदालतों में खारिज होती रही। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन अब तक किसी प्रकार का स्थगन आदेश नहीं मिला है।

सिविल सर्जन के लीगल एडवाइजर अब्दुल रब्बानी के अनुसार मामला फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है और वहां से कोई नया आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 15 दिनों के बाद न्यायालय क्या रुख अपनाता है और सिविल सर्जन परिसर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दोबारा शुरू होती है या नहीं। फिलहाल पूरे भागलपुर की नजरें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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