


भागलपुर में उच्च न्यायालय की खंडपीठ अथवा पटना उच्च न्यायालय के सर्किट बेंच की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। इस मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार जारी है और बुधवार को धरना प्रदर्शन के 100 दिन पूरे हो गए।
कलेक्ट्रेट कार्यालय के समीप आयोजित धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया और अपनी मांगों को दोहराया। गौरतलब है कि यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि वर्ष 1967 से ही सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं और विभिन्न समुदायों द्वारा लगातार उठाई जाती रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ओमप्रकाश तिवारी ने कहा कि भागलपुर पूर्वी बिहार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां उच्च न्यायालय की बेंच की स्थापना होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम हो जाएगी। इससे आसपास के लगभग 15 जिलों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इन जिलों के लोगों को अपने न्यायिक कार्यों के लिए पटना जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की काफी हानि होती है।
उन्होंने आगे कहा कि अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों द्वारा इस मांग को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है। अब इस आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए आसपास के जिलों के संगठनों को भी जोड़ा जा रहा है, ताकि इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके।
ओमप्रकाश तिवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस जनहित के मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाएं।
उन्होंने यह भी बताया कि यह मामला पहले संसद में उठाया जा चुका है, लेकिन उस समय यह कहकर टाल दिया गया था कि बिहार सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में अब राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह इस दिशा में पहल कर भागलपुर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना सुनिश्चित करे।
धरना स्थल पर अधिवक्ता मुकेश कुमार ठाकुर ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मांग क्षेत्र के लाखों लोगों की सुविधा से जुड़ी है और इसे अब और टाला नहीं जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों एवं विभिन्न संगठनों को उम्मीद है कि इस बार सरकार इस लंबे समय से लंबित मांग पर गंभीरता से विचार करेगी, जिससे पूर्वी बिहार के लोगों को न्यायिक सुविधा का लाभ मिल सके।















