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नवगछिया – अंग क्षेत्र की आस्था और संस्कृति का प्रतीक मानी जाने वाली सती बिहुला की स्मृति में नवगछिया स्थित मां मनसा विषहरी मंदिर में एक माह तक पारंपरिक बिहुला गीतों का आयोजन किया जाएगा। मंगलवार को नाग पंचमी की पूजा के साथ ही इस आयोजन की विधिवत शुरुआत कर दी गई।

बिहुला गीतों के माध्यम से श्रद्धालु मां मनसा विषहरी की कथा और सती बिहुला की तपस्या को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह गीत सुबह-शाम धूप-दीप और निष्ठा के साथ मंदिर में गाए जाते हैं। पूरे एक महीने तक श्रद्धालु भक्तिभाव से मां विषहरी की आराधना करते हैं।

नवगछिया बिहुला विषहरी समिति के मुकेश राणा ने बताया कि भगवान शंकर की मानस पुत्री मनसा विषहरी को पृथ्वीलोक पर पूजा दिलाने के लिए सती बिहुला का जन्म नवगछिया में हुआ था। यह नवगछिया वासियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि सती बिहुला अपने तप के बल पर अपने मृत पति और पूरे परिवार को स्वर्गलोक से जीवित वापस लाई थीं। तभी से पृथ्वीलोक में नागों की देवी मां मनसा विषहरी की पूजा घर-घर में होने लगी।

भक्त विमल किशोर पोद्दार ने बताया कि इस वर्ष विषहरी पूजा का शुभारंभ विशेष संयोग में नाग पंचमी के दिन हुआ है। श्रद्धालु पूरे एक माह तक नियमपूर्वक मां मनसा विषहरी की पूजा-अर्चना और बिहुला गीतों का आयोजन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बुधवार को मंदिर में प्रतिमा निर्माण के लिए मेढ़ पूजा की जाएगी।

विषहरी पूजा समारोह का मुख्य आयोजन 17 और 18 अगस्त को किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इस अवसर पर मनसा देवी की भव्य पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भक्ति गायन की योजना बनाई गई है।

नवगछिया का विषहरी मंदिर इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है, जहां बिहुला के तप और मां विषहरी की महिमा का गुणगान पूरे श्रद्धा के साथ किया जा रहा है।

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