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भागलपुर : श्री चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र में गुरुवार से शुरू हुए दस लक्षण महापर्व के प्रथम दिवस ‘उत्तम क्षमा’ का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दिन की शुरुआत मंगलकारी अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन से हुई। इसके पश्चात आरती, स्तुति और प्रभु भक्ति के मंत्रोच्चार से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। भजनों की सुमधुर धारा बहती रही और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

इंदौर से पधारे अभिनव जैन ने क्षमा धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि क्षमाशीलता व्यक्ति की महानता का परिचायक है। उत्तम क्षमा केवल दूसरों को क्षमा करना नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर की क्रोध-भावनाओं को शांत कर आत्मशुद्धि की दिशा में बढ़ने का एक प्रभावी माध्यम है। क्षमा आत्मा की गरिमा को दर्शाती है — जो क्षमा करता है, वह स्वयं को ऊँचा करता है। क्षमापना आत्मा का श्रृंगार है और यही आत्मा की सच्ची आराधना है। उन्होंने आगे कहा कि सत्यता से जीने में सहजता का आनंद मिलता है, जबकि निश्चिंतता धर्म मार्ग पर चले बिना संभव नहीं है। संस्कारविहीन व्यक्ति दूसरों को भी दुखी करता है। परिग्रह से सुख मापना दुखद है; मेहनत से सीखने वाले एक दिन महान बनते हैं। बुराई को रोकना ही सबसे बड़ी क्रांति है। जिसकी सोच बड़ी नहीं है, वह स्वयं बड़ा नहीं बन सकता। जो अपनी सुरक्षा स्वयं नहीं करता, उसकी रक्षा कोई और नहीं कर सकता।

प्रातःकालीन अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन कमलेश पाटनी द्वारा किया गया। तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की विशेष पूजन और भक्ति संपन्न हुई, जिसमें महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मंत्री सुनील जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि शुक्रवार को महापर्व के द्वितीय दिवस पर ‘उत्तम मार्दव’ धर्म की आराधना की जाएगी।

इस अवसर पर रितेश जैन (अहमदाबाद), बसंती लाल जैन (उज्जैन), विनय जैन (ग्वालियर), सुशील गोधा, जय कुमार काला, पवन बड़जात्या, उमेश सेठी, अजीत बड़जात्या, राम जैन, अमित जैन और संदीप कुर्मावाला सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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