



17 अक्टूबर को करेंगे नामांकन
नवगछिया : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र 153-गोपालपुर विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने इस सीट से बड़ा राजनीतिक बदलाव करते हुए चार बार के सिटिंग विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ़ गोपाल मंडल का टिकट काटकर पूर्व सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के इस फैसले के बाद इलाके की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

बुलो मंडल 2014 में राजद के टिकट पर भागलपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। बाद में उन्होंने राजद छोड़कर जदयू का दामन थाम लिया। जदयू में शामिल होने के बाद से ही वे लगातार गोपालपुर क्षेत्र में सक्रिय थे और संगठनात्मक स्तर पर मजबूत पकड़ बना रहे थे। अब पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें गोपालपुर से एनडीए का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। वे 17 अक्टूबर 2025 को नामांकन दाखिल करेंगे।
वहीं, लंबे समय से गोपालपुर सीट पर काबिज और चर्चित विधायक गोपाल मंडल को टिकट न देकर पार्टी ने बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। गोपाल मंडल अपने विवादित बयानों और व्यवहार के लिए अक्सर चर्चा में रहे हैं। कई बार पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। टिकट कटने के बाद गोपाल मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास के बाहर धरना दिया और साफ कहा था कि “बिना मिले नहीं जाऊंगा”। उनका यह विरोध साफ दर्शाता है कि वे पार्टी के इस निर्णय से बेहद नाराज़ हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने गोपाल मंडल को हटाकर ‘विवाद मुक्त’ और ‘लोकप्रिय’ चेहरे को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। बुलो मंडल का सामाजिक आधार मजबूत है और वे भागलपुर, खगड़िया, नवगछिया जैसे क्षेत्रों में खासा प्रभाव रखते हैं। उनके मैदान में आने से एनडीए को इस सीट पर नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र, भागलपुर जिले की प्रमुख सीटों में से एक मानी जाती है। यहां जातीय समीकरण, सामाजिक संतुलन और विकास के मुद्दे हमेशा चुनावी चर्चा में रहते हैं। गोपाल मंडल पिछले चार चुनावों से इस सीट पर जीत दर्ज करते आ रहे थे। 2020 में उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार पार्टी की रणनीति में बदलाव देखने को मिला है।
बुलो मंडल की उम्मीदवारी को लेकर जदयू के स्थानीय और जिला स्तरीय कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बुलो मंडल एक सुलझे हुए और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं, जो गोपालपुर की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। वहीं, गोपाल मंडल का अगला कदम अभी स्पष्ट नहीं है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं या किसी अन्य पार्टी का रुख कर सकते हैं।
फिलहाल, गोपालपुर विधानसभा सीट पर चुनावी पारा चढ़ चुका है और 17 अक्टूबर को नामांकन के साथ ही यह मुकाबला और दिलचस्प हो जाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि मतदाता इस नए समीकरण को कैसे स्वीकार करते हैं और क्या बुलो मंडल गोपाल मंडल की राजनीतिक विरासत को चुनौती दे पाएंगे।
















