


भागलपुर जिले के कहलगांव में उस समय खुशियों और उल्लास का अद्भुत माहौल देखने को मिला, जब बैजनाथ मोहनलाल रूंगटा स्मृति भवन में आयोजित सामूहिक विवाह महोत्सव के दौरान एक साथ आठ जोड़े वैवाहिक बंधन में बंध गए। सजे-धजे मंडप, वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच नवदंपतियों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लिया। पूरे परिसर में उत्साह, उमंग और पारिवारिक आनंद का वातावरण बना रहा।
यह भव्य आयोजन बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सहयोग प्रदान करना तथा सादगीपूर्ण और संस्कारयुक्त विवाह की परंपरा को बढ़ावा देना था। आयोजन के माध्यम से समाज में फिजूलखर्ची कम करने और सामूहिक सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया।
समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, समाजसेवी, व्यवसायी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में कहलगांव की विधायक भी शामिल हुईं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन समाज में समानता, सहयोग और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं तथा जरूरतमंद परिवारों के लिए यह एक प्रेरणादायक पहल है।
आयोजन समिति की ओर से सभी नवदंपतियों को विवाहोपयोगी गहनों के साथ-साथ घरेलू उपयोग की आवश्यक सामग्री भी भेंट स्वरूप प्रदान की गई, ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत आत्मविश्वास और सम्मान के साथ कर सकें। पूरे आयोजन में अनुशासन, पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता की सुंदर झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों ने आयोजन समिति की सराहना की और इसे समाजहित में एक अनुकरणीय पहल बताया। समारोह के समापन तक उत्सव का माहौल बना रहा और उपस्थित लोगों ने नवदंपतियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।












