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नवगछिया प्रखंड के खगड़ा गांव में स्थित प्रसिद्ध माँ बम काली मंदिर लगभग 313 वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिए भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस पावन दरबार से आज तक कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटा है।

गांव के लोग माँ बम काली की पूजा वैदिक एवं तांत्रिक विधि से करते हैं। स्थानीय जनश्रुतियों और मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना खगड़ा गांव के पूर्वज बाबू धौताल सिंह के तीसरे वंशज बाबू प्रभु नारायण सिंह को एक दिव्य स्वप्न प्राप्त होने के पश्चात हुई। उसी स्वप्न में माँ बम काली की स्थापना का आदेश मिला, जिसके बाद मंदिर की नींव रखी गई और तब से आज तक यह परंपरा अनवरत जारी है।

समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार भी किया गया, परंतु इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और तांत्रिक परंपराएं आज भी जीवित हैं। यहाँ की एक विशेष परंपरा छाग बलि देने की है, जो वर्षों से चली आ रही है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को यहाँ विशेष तांत्रिक पूजा होती है, जिसमें विशाल 8 फीट की माँ बम काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस पूजा में गांव के लोग तथा सभी कुटुंबजन बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं।

पूजा के दौरान जब माँ का नयन पूजन और निशा पूजन होता है, तो एक अलौकिक ऊर्जा का अनुभव होता है, और उस क्षण सभी भक्त अपनी आंखें बंद कर लेते हैं। पूजा में मुख्य रूप से दुलुप पुष्प का प्रयोग किया जाता है, जिसे माँ अत्यंत प्रिय मानती हैं। भक्तगण जब भी अपनी मनोकामना की पूर्ति होते देखते हैं, तो श्रद्धा से विशेष चढ़ावा चढ़ाते हैं, जिसमें छाग बलि का विशेष स्थान होता है।

माँ बम काली पूजा समिति के कार्यकारिणी सदस्य धीरज सिंह ने बताया कि स्थानीय लोगों में यह अटूट विश्वास है कि माँ काली इस स्थान पर साक्षात जागृत रूप में विराजमान हैं। यहाँ जो भी सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा माँ अवश्य पूरी करती हैं। यही कारण है कि बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड, बंगाल और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं। जो लोग किसी कारणवश नहीं आ पाते, वे माध्यमों के द्वारा अपनी श्रद्धा भेजते हैं, और ऑनलाइन दर्शन भी करते हैं।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रंजीत शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष 20 अक्टूबर को अमावस्या तिथि की रात्रि में माँ की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। 21 अक्टूबर को भव्य संध्या आरती का आयोजन होगा और 22 अक्टूबर को परंपरागत पैरवा तिथि में महाआरती के बाद माँ को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। यह विसर्जन समस्त ग्रामवासियों तथा बाहर से आए श्रद्धालुओं द्वारा कंधे पर माँ को उठाकर किया जाएगा।

वहीं, मंदिर समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पूजा समिति द्वारा मंदिर परिसर की सफाई, सजावट और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

माँ बम काली मंदिर, खगड़ा न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है, जहाँ हर वर्ष हजारों श्रद्धालु माँ की कृपा पाने के लिए खिंचे चले आते हैं।

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