


गोपालपुर के सैदपुर दुर्गा मंदिर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के द्वारा चल रहे पांच दिवसीय श्री हरि कथा के तृतीय दिवस के दिन सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी अमृता भारती जी ने कहा कि जब जब मानव मायापति को भूलकर माया में लिप्त हो जाता है तब तब प्रभु माया में लिप्त ऐसे मानव को जगाने के लिए अनेकों लीलाएं करते हैं एक बार लीलाधारी ने ऐसे ही लीला भक्त नरसी के जीवन में की जब नरसी माया में उलझ गया तब प्रभु ने जीवन की सत्यता का बोध कराने और संसारिक कुचक्रों से मुक्त कराने के लिए उसके जीवन में एक अद्भुत लीला रची , प्रभु ने अपना रूप बदलकर भक्त नरसी के घर में ही रहने लगे और ऐसी लीला रची की प्रभु की लीला में उलझ गया और अपने ही आखों के सामने अपने धनकोष को लुटता देख रहा था ,नरसी को यह समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है मेरे साथ तभी प्रभु के चरणों में झुक गया, ओर बोला की प्रभु अब आप ही कृपा कीजिए , मुझे कुछ समझ मे नहीं आ रहा है ,फिर प्रभु उसके समक्ष प्रकट होकर अपनी लीला का रहस्य उसे समझाते हुए कहते है माया में रह कर मायापति से जुडकर हमे संसार में कैसे रहना है और आगे , इसी विषय पर प्रकाश डालते हुए आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी श्री सुकर्मानंद जी जीने अपने विचारों में कहा कि धन की तीन गति होती है । दान ,भोग ,और नाश ,सबसे उत्तम गति धन की दान मानी जाती है मध्यम भोग और सबसे निम्न गति धन की नाश मानी जाती है लेकिन दान देना कहां चाहिए हमें यह भी पता होना चाहिए संत कबीर साहिब जी ने भी कहा गुरु बिन माला फेरता गुरु बिन करता दान कहे कबीर निष्फल गया गया ,गावहि वेद पुरान! कि वास्तव में दान कहां करना है कितना करना है कैसे करना है यह पूर्ण गुरु के शरणागति को प्राप्त करके ही पता चलता है इसलिए हमें जीवन में ऐसे पूर्ण गुरु की प्राप्ति करने के लिए अपना कदम बढ़ाना चाहिए जिस के मार्गदर्शन में दान का वास्तविक महत्व पता चलता है फिर दान करने से जो हमारे जीवन में लाभ प्राप्त होता है उसका कोई वर्णन नहीं , ओर ऐसा दान न जाने हमारे कितने कर्मों को काट देता है हमारे जीवन को उत्थान की ओर अग्रसर कर देता है कार्यक्रम में काफी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया और बढ़-चढ़कर सहयोग भी दिया और साथ ही मंच पर उपस्थित साध्वी शीतली भारती पुष्पा भारती चंदन कुमार गोपाल जी रामचंद्र जी अन्य साधु समाज मंच पर उपस्थित थे और इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु क्षेत्र के मुख्य कार्यकर्ता पूरी तत्परता से सेवा कार्य में जुटे हुए थे















