0
(0)

महिलाओं के सम्मानजनक परिवेश और लैंगिक समानता पर वक्ताओं ने रखे विचार, छात्राओं ने लोकगीत व कविता प्रस्तुत की

नवगछिया :
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को मदन अहल्या महिला महाविद्यालय, नवगछिया के हिन्दी विभाग, गृह विज्ञान विभाग तथा आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘21वीं सदी में भारतीय स्त्री’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन आभासी माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और समाज में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अवधेश रजक ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने अपनी प्रतिभा, श्रम और जिजीविषा के बल पर हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध की है। 21वीं सदी के इस दौर में महिलाओं के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण तैयार करना अत्यंत आवश्यक है, तभी सशक्त महिलाएं समाज के सामने आएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में बिहार सरकार की कई योजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संगोष्ठी की मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियन एवं झारखंड की डीएसपी श्रीमती अरुणा मिश्रा थीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि सहयोगी हैं। महिलाओं की सफलता में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए समाज में द्वेषपूर्ण सोच के बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्त्रियों को संघर्ष और चुनौतियों का सामना साहस के साथ करना चाहिए और हार मानने की प्रवृत्ति को त्यागना होगा। श्रीमती मिश्रा ने अपने बॉक्सिंग और पुलिस सेवा से जुड़े कई प्रेरणादायक अनुभव भी साझा किए।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुंदरवती महिला महाविद्यालय, भागलपुर के हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. आशा तिवारी ओझा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास का सही पैमाना वहां की महिलाओं की स्थिति से तय होता है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं घर के बजट से लेकर देश के बजट तक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हालांकि एक ओर महिलाओं की स्थिति में सुधार दिखता है, वहीं दूसरी ओर दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसी समस्याएं आज भी समाज में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाएं यह दर्शाती हैं कि महिलाओं को अभी भी व्यापक प्रोत्साहन और सुरक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्त्री विमर्श को केवल बौद्धिक चर्चाओं तक सीमित न रखकर इसे समाज के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

महाविद्यालय के वरीय शिक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि आधी आबादी की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है। महिलाओं की उन्नति ही वास्तव में राष्ट्र की उन्नति है।

डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि महिलाओं के उत्थान और सुरक्षा के लिए उन्हें जागरूक बनाना आवश्यक है। जिस प्रकार परिवार की गाड़ी दो पहियों पर चलती है, उसी तरह समाज और देश की प्रगति भी पुरुष और महिला दोनों के सहयोग से ही संभव है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. ममता कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आईक्यूएसी के समन्वयक डॉ. धर्मेंद्र दास ने किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनुराधा, डॉ. किरण कुमारी, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. पुष्पा कुमारी, डॉ. नाहिदा फातिमा और डॉ. नीलू सहित कई शिक्षकों ने अपने विचार रखे। इसके अलावा मारवाड़ी महाविद्यालय, दरभंगा के सहायक प्राध्यापक डॉ. गजेन्द्र भारद्वाज और मुंबई विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र के डॉ. वेद प्रकाश दुबे ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की छात्रा राजकन्या ने स्त्री मुक्ति से संबंधित लोकगीत प्रस्तुत किया, जबकि दीक्षा ने अपनी स्वरचित कविता का पाठ कर उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और छात्राओं ने भाग लेकर महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: