



नवगछिया अनुमंडल में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि के चलते अब नदी का कटाव विकराल रूप लेने लगा है। रंगरा प्रखंड के तिनटंगा क्षेत्र में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां गंगा का रुख एक बार फिर गांवों की ओर मुड़ गया है। विशेष रूप से झल्लू दास टोला और ज्ञानी दास टोला में कटाव की तीव्रता के कारण ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल बना हुआ है।

रविवार को ज्ञानी दास टोला में एक बड़ा हादसा सामने आया, जब नल-जल योजना के तहत बना जल मीनार महज 40 सेकंड में गंगा में समा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गंगा की तेज धार ने कुछ ही मिनटों में कई फीट जमीन और पेड़-पौधों से घिरे बागानों को अपने साथ बहा लिया। देखते ही देखते जल मीनार भरभराकर गिरा और नदी की लहरों में पूरी तरह समा गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते एक सप्ताह से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे नदी का दबाव अब गांव की ओर बढ़ने लगा है। कटाव की इस तेज गति के कारण अब केवल मिट्टी ही नहीं, बल्कि पक्के मकान और बुनियादी ढांचे भी प्रभावित हो रहे हैं। सामने आए एक वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि कैसे नदी के किनारे बनी पक्की संरचनाएं भी कुछ ही पलों में कटाव के चलते ढह गईं।
स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। गंगा के बढ़ते दायरे के कारण कई घर अब सीधे कटाव के मुहाने पर आ चुके हैं। प्रभावित परिवार अपने घरों का सामान और ज़रूरी चीजें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं। कई लोगों ने अस्थायी रूप से पास के स्कूलों, ऊंचे स्थानों या रिश्तेदारों के घरों में शरण ले ली है।
प्रशासन की ओर से फिलहाल हालात पर निगरानी रखी जा रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक कोई ठोस बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अगर समय रहते समुचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में दर्जनों घर, खेत और बाग-बगीचे नदी में समा सकते हैं।
गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज होते कटाव ने क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों की आजीविका, मकान और सुरक्षित जीवन—तीनों पर संकट मंडरा रहा है। इस दोहरे संकट से निपटने के लिए प्रशासन को जल्द से जल्द राहत और बचाव कार्यों को तेज करना होगा, ताकि और नुकसान से बचा जा सके।













