



भागलपुर: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत भागलपुर जिले की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अब तक 4 लाख 97 हजार से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में योजना की राशि अंतरित की जा चुकी है। सोमवार को आयोजित राशि अंतरण कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनमें से 61 हजार 500 से अधिक महिलाओं के खातों में इसी दिन योजना की राशि भेजी गई।

मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण के अवसर पर यह जानकारी दी गई। पटना स्थित एक अणे मार्ग से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करकमलों द्वारा राज्यभर की 25 लाख महिला लाभुकों के खातों में प्रति लाभुक 10-10 हजार रुपये की दर से कुल 2500 करोड़ रुपये की राशि का अंतरण किया गया। इस लाभ में भागलपुर जिले की 61 हजार 500 से अधिक महिलाएं भी शामिल रहीं।
भागलपुर समाहरणालय स्थित समीक्षा भवन में कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया, जिसमें जिलाधिकारी सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं उपस्थित रहीं। इस अवसर पर डीआरडीए के निदेशक दुर्गा शंकर सिंह, अमर कुमार मिश्रा, जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन तथा जीविका दीदियां और कर्मी मौजूद रहे।

जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू होने के बाद जिले में जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सितंबर 2025 तक जहां 3 लाख 20 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 4 लाख 32 हजार से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि योजना के कारण महिलाओं में स्वरोजगार के प्रति रुचि बढ़ी है और वे बड़ी संख्या में समूहों से जुड़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत लाभान्वित महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। शुरुआती चरण में महिलाओं द्वारा किराना दुकान, स्टेशनरी, मनिहारी, सब्जी एवं फल विक्रय, गाय एवं बकरी पालन, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर तथा फूड प्रोसेसिंग जैसे छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए गए हैं, जिससे उनकी नियमित आय सुनिश्चित होने लगी है।
जिलाधिकारी ने कहा कि लाभुक परिवारों द्वारा शुरू किए गए व्यवसायों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा और अगले छह माह में प्रगति के आधार पर चार अलग-अलग किश्तों में अधिकतम 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जा सकती है। इसके लिए विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि लाभान्वित महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में हाट-बाजार विकसित करने की भी योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार से जोड़ते हुए उनकी आय बढ़ाना तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
इस योजना के प्रभाव से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आर्थिक मजबूती के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान भी बढ़ रहा है, जिससे स्थायी विकास की दिशा में नया मार्ग प्रशस्त हो रहा है।













