



भागलपुर के टाउन हॉल में आलय नाट्य संस्था द्वारा प्रसिद्ध नाटक ‘कोर्ट मार्शल’ का मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन कुमार चैतन्य प्रकाश ने किया और मंचन में फ़ौजदारों की भागीदारी भी विशेष रही। ‘कोर्ट मार्शल’ को सुप्रसिद्ध नाटककार स्वदेश दीपक ने लिखा है, जो भारतीय सेना की पृष्ठभूमि में जातिवाद और सामाजिक असमानता जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है।

नाटक की कहानी एक सिपाही रामचंद्र के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने अधिकारी द्वारा लगातार किए जा रहे अपमानजनक व्यवहार से क्षुब्ध होकर आत्मरक्षा में गोली चला देता है। इसके बाद उस पर कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू होती है। नाटक इस घटना के माध्यम से केवल एक सैनिक की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं दिखाता, बल्कि समाज में गहराई से व्याप्त जातिगत भेदभाव और अन्याय पर तीखा सवाल उठाता है।
‘कोर्ट मार्शल’ केवल एक अपराध की कानूनी पड़ताल नहीं करता, बल्कि यह मानव स्वभाव, सामाजिक ढांचे, वर्गीय शोषण और सत्ता की मानसिकता पर भी गहरी चोट करता है। इसमें दर्शाया गया है कि कैसे दबे-कुचले वर्गों की आवाज़ को बार-बार कुचला जाता है, और जब यह दमन अपनी सीमा पार कर जाता है, तो वह एक बड़े विस्फोट का रूप ले लेता है।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसे भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को विभिन्न माध्यमों से प्रस्तुत किया जा सकता है, और नाटक उन प्रभावशाली माध्यमों में से एक है जो समाज को आईना दिखाता है और उसे झकझोरने का कार्य करता है।
आलय नाट्य संस्था के निर्देशक कुमार चैतन्य प्रकाश ने मंचन के बाद कहा,
“कोर्ट मार्शल में दिखाया गया दृश्य समाज का चुभता हुआ, ज्वलंत और कटु सत्य है। यह नाटक केवल दृश्य नहीं है, यह हमारी चुप्पियों का प्रतिवाद है।”

इस प्रस्तुति ने दर्शकों को न केवल भावनात्मक रूप से झकझोरा, बल्कि उन्हें आत्ममंथन के लिए भी विवश कर दिया। यह नाटक भारतीय रंगमंच में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, जो समाज के सबसे संवेदनशील मुद्दों को सशक्त रूप में मंच पर लाता है।












