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नारायणपुर के नवटोलिया गांव में स्थित मां दक्षिणेश्वरी काली का मंदिर अपने अद्वितीय धार्मिक महत्व और महिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भक्तों की सभी मनोरथ शीघ्र पूर्ण होते हैं। करीब 150 साल पहले इस मंदिर के पास ही गंगा और कोसी का संगम स्थल था।

गांव के ही महान पंडित स्व. गेना लाल झा ने इस पिंडी का प्राण प्रतिष्ठा किया था। उनकी वैदिक और तंत्र मार्गी संकलित मंत्रों से देवी के साथ-साथ योगिनी सेना की पूजा की जाती है। वर्तमान में पंडित सुनील झा उर्फ पीपो झा नियमित रूप से पिंडी की पूजा करते हैं।

मंदिर में मूर्तिकार उपवास रहकर भगवान शिव के वक्ष पर खड़ी मां काली तथा उनके दाएं-बाएं योगिनी और सेना की प्रतिमा बनाते हैं। देवी के कान पर दो गुप्त चर की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं, जिन्हें श्रुति परंपरा के अनुसार दायें कान पर ‘श्रवणा’ और बाएं कान पर ‘श्रवणी’ कहा जाता है। पिंडी पर देवी को नयन प्रदान किए जाते हैं।

पंडित मिथिलेश कुमार उर्फ मुरली झा के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन श्यामा पूजा के अवसर पर भगवती स्वरूपा योगमाया की दक्षिणेश्वरी काली के रूप में विधिवत पूजा की जाती है। इस पूजा में वैदिक और तंत्र मार्गी विधियों का पालन किया जाता है। यहां बलि की परंपरा भी निभाई जाती है।

मंदिर दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी मौजूद हैं। मां काली के परम भक्त पंडित गेना लाल झा की प्रतिमा भी यहां स्थापित है। मंदिर की नींव गांव के ही प्रेम खलीफा ने रखी थी और ग्रामीणों के सहयोग से वर्षों पहले इसका पक्कीकरण भी किया गया।

मंदिर में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन पास की गंगा नदी में किया जाता है। नवटोलिया का यह मंदिर धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

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