



भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड स्थित तहसुर और सैदपुर घाट पर पुल निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का धरना लगातार जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में पुल बनाए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार या प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
धरने में शामिल ग्रामीण रवि कुमार ने बताया कि इन दोनों घाटों पर पुल नहीं होने के कारण आम लोगों को प्रतिदिन आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषकर तब मुश्किल और भी बढ़ जाती है जब किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना होता है। उन्होंने कहा, “घाट पार करने में घंटों लग जाते हैं, जिससे कई बार मरीज की हालत और भी बिगड़ जाती है।”

धरने पर बैठे लोगों ने यह भी बताया कि अगर इन घाटों पर पुल बन जाता है तो तहसुर, सैदपुर और आस-पास के कई गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। आवाजाही सुगम हो जाएगी, बच्चों को स्कूल जाने में आसानी होगी, व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी।
प्रदर्शनकारी नेहा ने कहा कि सरकार सिर्फ आश्वासन देती है, लेकिन ज़मीन पर कोई काम नहीं होता। हम तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक पुल निर्माण की ठोस घोषणा नहीं हो जाती।

संघर्ष समिति के सदस्य राकेश झा ने आरोप लगाया कि कई दिनों से आमरण अनशन चल रहा है, लेकिन अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी स्थल पर नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और भी उग्र किया जाएगा।
प्रदर्शन में शामिल काजल ने कहा कि यह सिर्फ विकास का सवाल नहीं है, बल्कि ज़िंदगी और ज़रूरत का मामला है। गांव की महिलाएं और बुज़ुर्ग भी इस आंदोलन में शामिल हैं।
संघर्ष की अगुवाई कर रहे विनोद कुमार सिंह, जो संघर्ष समिति के अध्यक्ष हैं, ने बताया कि यह आंदोलन केवल पुल के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
इस जन आंदोलन ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराज़गी और उपेक्षा के भाव को उजागर किया है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस मांग पर प्रशासन कब तक और कितना गंभीरता से विचार करता है।
















