


भागलपुर जिले के सुलतानगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत बालू घाट रोड स्थित श्री उदासीन पंचायती अखाड़ा बड़ा की आत्मादास ठाकुरबाड़ी में बड़े स्तर पर अनियमितता और धार्मिक मर्यादा भंग करने का मामला सामने आया है।
नवनियुक्त महंत ने आरोप लगाया है कि ठाकुरबाड़ी के पूर्व प्रबंधक नरेंद्र प्रताप चौधरी और उनके परिवार ने ठाकुरबाड़ी की ऊपरी मंजिल पर अवैध कब्जा कर लिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मठ परिसर में महिलाओं और पालतू कुत्तों का प्रवेश कराया जा रहा है, जिससे ठाकुरबाड़ी की धार्मिक मर्यादा और आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
महंत ने बताया कि पूर्व महंत कश्यपदास ने पंचायती अखाड़े की अनुमति के बिना ही नरेंद्र प्रताप चौधरी को प्रबंधक और उनके छोटे भाई को उप-प्रबंधक नियुक्त कर दिया था। इनकी मिलीभगत से ठाकुरबाड़ी से अष्टधातु की कीमती मूर्तियां और जेवरात गायब कर दिए गए हैं, जिनमें ठाकुर जी और गणेश जी की मूर्तियां शामिल हैं। बताया गया कि इन मूर्तियों में हीरे भी जड़े हुए थे, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है।
महंत ने आगे बताया कि मठ की जमीन और भवन को भी गिरवी रख दिया गया है। इस गंभीर मामले को लेकर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
जांच के लिए बनाई गई समिति ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व महंत और प्रबंधक को दोषी पाया है। समिति के सामने स्थानीय लोगों ने भी उनके काले कारनामों का खुलासा किया। इसके बाद संस्था द्वारा दोनों को निष्कासित कर दिया गया और मठ की सभी चाबियों को जब्त कर लिया गया है।
महंत ने कहा कि उन्हें पूर्व प्रबंधक द्वारा जान से मारने की धमकी मिल रही है और उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि उनकी कभी भी हत्या हो सकती है।
उन्होंने बताया कि सावन माह में सैकड़ों कांवरिया ठाकुरबाड़ी में ठहरते हैं, लेकिन अब उस स्थान पर भी कब्जा कर लिया गया है। यात्रियों के ठहरने और खाने की व्यवस्था हर वर्ष की जाती थी, जिसे इस बार बाधित किया गया है।
महंत ने लोगों से अपील की है कि ठाकुरबाड़ी की मर्यादा और आस्था को बचाने के लिए सभी को एकजुट होना होगा।













