



रामलीला मंच पर गूंजा धर्म का जयघोष, ताड़का-मारीच वध की लीला ने बांधा समां
नवगछिया बाजार स्थित घाट ठाकुरबाड़ी प्रांगण में चल रहे भव्य श्रीरामलीला महोत्सव के दूसरे दिन रविवार की रात श्रद्धालुओं ने धर्म और अधर्म के संघर्ष की जीवंत प्रस्तुति देखी। जय मां भवानी श्रीरामलीला मंडल, काशी वाराणसी विंध्याचल धाम (उत्तर प्रदेश) के कलाकारों द्वारा मंचित लीला में मुनि विश्वामित्र का अयोध्या आगमन, ताड़का वध और मारीच दरबार की घटनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

मंचन की शुरुआत उस प्रसंग से हुई जब महाबली मारीच और सुबाहु चारों दिशाओं में आतंक मचाते हैं और यज्ञ जैसे धार्मिक अनुष्ठानों को विध्वस्त करते हैं। इस संकट से चिंतित होकर महर्षि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचते हैं और चक्रवर्ती सम्राट दशरथ से यज्ञ की रक्षा हेतु अपने पुत्रों राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेजने का आग्रह करते हैं। दशरथ आरंभ में संकोच करते हैं कि राम अभी बालक है, वह राक्षसों से कैसे लड़ेगा। किंतु विश्वामित्र के आग्रह, दृढ़ विश्वास और धर्म रक्षा के संकल्प के आगे राजा को झुकना पड़ता है और वे दोनों कुमारों को मुनि के साथ भेजने की अनुमति देते हैं।
अगले दृश्य में जब राम और लक्ष्मण वनमार्ग में आगे बढ़ते हैं, तो उनका सामना ताड़का नामक राक्षसी से होता है, जो रौद्र रूप धारण कर उन्हें डराने का प्रयास करती है। राम अपने धनुष-बाण से उसका अंत कर देते हैं। इसके बाद मारीच और सुबाहु विशाल सेना के साथ यज्ञ स्थल पर आक्रमण करते हैं, लेकिन श्रीराम ने एक-एक करके सभी राक्षसों का संहार कर दिया। मारीच भयभीत होकर जान बचाकर भाग खड़ा होता है। मंच पर राक्षसों के उग्र स्वरूप, युद्ध के प्रभावी दृश्य और राम का शांत लेकिन दृढ़ चरित्र श्रद्धालुओं के मन में गहराई से उतर गया।

इस लीला में दर्शाया गया कि कैसे धर्म के मार्ग पर चलने वाले— एक बालक के रूप में भी—अधर्म को परास्त कर सकते हैं। यह संपूर्ण प्रसंग धर्म की रक्षा, गुरु की आज्ञा और मातृआशीर्वाद के महत्व को रेखांकित करता है। मंचन के दौरान जब राम वनगमन के लिए प्रस्थान करते हैं, तो यह भाव भी उभरकर सामने आता है कि माता कौशल्या अपने पुत्र को आशीर्वाद देते हुए कहती हैं:
“यशस्वी भव पुत्र त्वम् दीर्घायुष्मा भवेति च।
गच्छ त्वं दण्डकारण्यं क्षेमेण पुनरागमः॥”
अर्थात् – हे पुत्र! तुम यशस्वी और दीर्घायु बनो, दण्डकारण्य जाकर सकुशल लौटो।
रामलीला मंचन इतना प्रभावशाली था कि श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। जय श्रीराम के जयकारों से पूरा रामलीला परिसर गूंज उठा। आयोजन समिति द्वारा पंडाल, प्रकाश व्यवस्था, जलपान व सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए थे। नगरवासी, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्म और संस्कृति से जुड़ाव का अनुभव कर रहे हैं। यह आयोजन 13 जुलाई तक प्रतिदिन रात 8 से 11 बजे तक चलने वाला है, जिसमें श्रीराम के जीवन की विभिन्न लीलाओं का मंचन किया जाएगा।













