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भागलपुर। सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर तक कांवरियों की अपार भीड़ उमड़ती है। हर कोई अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भोलेनाथ को गंगाजल अर्पित करने निकलता है। इसी श्रद्धालु समूह में कोलकाता से आए एक दिव्यांग कांवरिया रंजीत चटर्जी की आस्था ने सभी को भावुक कर दिया।

पैरों से चलने में असमर्थ रंजीत चटर्जी अपनी हथेलियों और घुटनों के सहारे कांवर पथ पर कठिन और लंबी यात्रा तय कर रहे हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य है — देवघर पहुंचकर बाबा भोलेनाथ को गंगाजल चढ़ाना। उनका संकल्प और साहस हर किसी को नमन करने पर मजबूर कर रहा है।

रंजीत ने कहा कि भले ही शरीर साथ न दे, लेकिन आस्था में कोई बाधा नहीं है। यह यात्रा न केवल एक धार्मिक प्रयास है, बल्कि उस अडिग विश्वास की मिसाल भी है जो हर कठिनाई को परास्त कर देता है। कांवर पथ पर उनका यह समर्पण, शिवभक्ति के अद्भुत जज़्बे को दर्शाता है।

दिव्यांग कांवरिया की यह श्रद्धा दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकी है और राह चलते हर श्रद्धालु उन्हें देखकर भावविभोर हो रहा है।

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