


भागलपुर । जिला स्तरीय मशाल खेल प्रतियोगिता का चौथा और अंतिम दिन खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए बेहद खास रहा। अंतिम दिन अंडर-16 बालक वॉलीबॉल प्रतियोगिता के सेमीफाइनल और फाइनल मैच खेले गए।
पहला सेमीफाइनल खरीक और बिहपुर के बीच खेला गया, जिसमें बिहपुर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खरीक को सीधे सेटों में 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। बिहपुर की ओर से प्रियांशु कुमार का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। दूसरा सेमीफाइनल नाथनगर और सन्हौला के बीच खेला गया। इस रोमांचक मुकाबले में सन्हौला ने पहला सेट गंवाने के बाद जोरदार वापसी करते हुए नाथनगर को 2-1 से पराजित किया। सन्हौला की ओर से उमर अब्दुल और मो. जुनैद ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन किया।
फाइनल मुकाबला अपराह्न 3 बजे बिहपुर और सन्हौला के बीच खेला गया। जिला खेल पदाधिकारी जय नारायण कुमार ने मैच का उद्घाटन किया। तीन सेट तक चले इस कांटे के मुकाबले में बिहपुर ने सन्हौला को 2-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया। फाइनल में बिहपुर के प्रियांशु और सन्हौला के उमर अब्दुल ने शानदार प्रदर्शन किया। निर्णायक की भूमिका कुमार शुभम और साकेत कुमार ने निभाई, जबकि स्कोरर के रूप में शिक्षिकाएं खुशबु कुमारी और शिवानी कुमारी रहीं।
इस अवसर पर जिला वॉलीबॉल सचिव अजय राय, उपाध्यक्ष निखिल राय, राष्ट्रीय रेफरी संदीप कुमार, जिला खेल कार्यालय के लिपिक मृणाल किशोर, शारीरिक शिक्षक राजवर्धन कुमार, अभय कुमार मिश्रा सहित कई खेलप्रेमी मौजूद रहे। प्रतियोगिता के आधार पर सात खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तरीय मशाल प्रतियोगिता, पटना के लिए किया गया है।
कबड्डी और फुटबॉल में भी रोमांचक मुकाबले हुए। अंडर-16 बालक वर्ग कबड्डी के फाइनल में नाथनगर ने सुल्तानगंज को 26 अंकों से हराया, वहीं बालिका वर्ग में कहलगांव ने बिहपुर को 13 अंकों से मात दी। फुटबॉल फाइनल में कहलगांव ने नाथनगर को 3-1 से पराजित कर ट्रॉफी पर कब्जा किया।
शाम 4 बजे आयोजित समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर सहायक समाहर्ता जतिन कुमार, अपर समाहर्ता दिनेश राम, संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पांडेय सहित कई अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
सहायक समाहर्ता जतिन कुमार ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में खेल का विशेष महत्व है। खेल स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने और जीवन में अनुशासन लाने में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए “मेडल लाओ, नौकरी पाओ” जैसी योजनाएं चला रही है, जिसके तहत कई खिलाड़ियों को राजपत्रित पदों पर नियुक्ति भी मिली है।
संयुक्त निदेशक नागेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि वे बचपन में फुटबॉल और कैरम के खिलाड़ी रहे हैं। हालांकि पढ़ाई-लिखाई में व्यस्त रहने के कारण खेल छूट गया, लेकिन आज भी वे नियमित रूप से पैदल चलते हैं। उन्होंने कहा कि आज खेल को करियर के रूप में अपनाने के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं और सरकार खिलाड़ियों को हर संभव सहायता दे रही है।
समापन समारोह में विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। पूरे आयोजन के दौरान खेल भावना और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला।












