



भागलपुर। बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को भागलपुर सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पैक्स, व्यापार मंडलों, अन्य सहकारी समितियों के अध्यक्षों, प्रबंधकों और किसानों ने भाग लिया। मंत्री ने सहकारिता विभाग की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि सहकारिता का मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों की आय को दोगुना करना है।
मंत्री ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से राज्य को समृद्धि की ओर ले जाना है, इसलिए इसे और व्यापक रूप दिया जा रहा है। रैयत और गैर-रैयत कृषकों को भी पैक्स का सदस्य बनाकर विभिन्न लाभों से जोड़ा जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सभी कार्य पारदर्शी हों और हर सदस्य को सहकारी संगठन का लाभ मिले।

बैठक में विभिन्न फसल सहायता योजनाओं पर भी चर्चा की गई। रबी 2024 के लिए 33,344 किसानों के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनका सत्यापन कर विभाग को भेजा गया है। रबी 2023 में 472 आवेदन प्राप्त हुए थे। खरीफ 2023 में 32,182 और खरीफ 2024 में 4,140 किसानों के आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनका सत्यापन कर संबंधित रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है।
धान अधिप्राप्ति के अंतर्गत खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के लिए भागलपुर जिले को 50,731 मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला था, जिसके विरुद्ध अब तक 6,698 किसानों से 42,196.38 मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई है। इस अधिप्राप्त धान से 28,98,049 एमटी समतुल्य सीएमआर के विरुद्ध 20 जुलाई तक 26,7y27 एमटी की आपूर्ति राज्य खाद्य निगम को की जा चुकी है।
गेहूं अधिप्राप्ति के अंतर्गत जिले में 14 किसानों से 7.30 एमटी गेहूं खरीदा गया, जिसकी आपूर्ति समय सीमा के भीतर राज्य खाद्य निगम को की गई और संबंधित किसानों को समय पर भुगतान भी किया गया।

दलहन अधिप्राप्ति हेतु पांच व्यापार मंडलों का चयन किया जा रहा है। चना 5650 रुपये, मसूर 8700 रुपये और सरसों 6950 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम समर्थन मूल्य दर से दलहन की खरीद की जा रही है। यह अधिप्राप्ति 25 जून से शुरू हो चुकी है।
किसानों की आय में वृद्धि के लिए 12 प्रखंडों में किसान उत्पादन सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इसके अलावा 15 प्रखंडों में सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों की स्थापना की गई है, जो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से कार्य कर रही हैं। अवशेष प्रखंडों में भी इसी प्रकार की समितियों का गठन किया जा रहा है।
भागलपुर जिले के 75 पैक्सों में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से किसानों और आम नागरिकों को जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र, बिजली बिल भुगतान, धान अधिप्राप्ति के ऑनलाइन आवेदन और रेलवे टिकट जैसी 300 प्रकार की सेवाएं न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अतिरिक्त 12 प्रखंडों में शहद उत्पादक एवं प्रसंस्करण सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जो मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित कर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से सुधा ब्रांड के अंतर्गत गाय और भैंस के दूध का संग्रहण और विक्रय किया जा रहा है, जिससे किसानों को स्थायी आमदनी का साधन मिल रहा है।
पैक्स को अनाज भंडारण के लिए गोदाम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पंचायत स्तर पर सहकारी बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र खोलने की प्रक्रिया भी जारी है। जेएलजी समूह और “संदेश दीदी” जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंक से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
सरकार की योजना है कि हर घर का कम से कम एक सदस्य किसी न किसी सहकारी समिति से जुड़कर लाभान्वित हो। बुनकरों, मछुआरों और मधुमक्खी पालकों के लिए महासंघ का गठन कर उन्हें सहकारी योजना से जोड़ा जाएगा।
बैठक के अंत में मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने संयुक्त निबंधक (सहयोग समितियां), प्रमंडल भागलपुर, जिला सहकारिता पदाधिकारी, भागलपुर-बांका, और भागलपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बैठक की कार्यवाही समाप्त की।













