



भागलपुर।
महान समाज सुधारक, दार्शनिक एवं संत शिरोमणि कवि रैदास की 627वीं जयंती सम्मानपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर स्थानीय मोहनपुर स्थित जगदीश बौधी स्मृति आवास में “सामाजिक बदलाव का संघर्ष और संत रैदास” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संत रैदास को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके सपनों के समतामूलक समाज के निर्माण के संकल्प के साथ की गई।

विचार गोष्ठी की अध्यक्षता भाकपा-माले के नगर प्रभारी एवं ऐक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त ने की। उन्होंने संत रैदास की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रैदास जी ने समाज को प्रेम, भाईचारा और मानवता की राह दिखाई। उनका मानना था कि वाणी की धार चाकू की धार से भी अधिक तीखी होती है, जो बिना खून बहाए गहरे घाव कर सकती है। उन्होंने तर्क, विवेक और सहज बुद्धि के आधार पर सत्य को स्वीकार करने का संदेश दिया।

मुकेश मुक्त ने कहा कि संत रैदास का स्पष्ट मत था कि कोई भी व्यक्ति जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता, बल्कि अपने कर्मों से उसका मूल्यांकन होता है। उन्होंने समाज में घृणा और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होने की बात कही और समानता आधारित, भेदभाव-मुक्त तथा सहिष्णु समाज के निर्माण पर जोर दिया।

उन्होंने वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज भी समाज में भेदभाव मौजूद है और कुछ शक्तियां इसे बढ़ावा दे रही हैं। साम्प्रदायिक और सामंती ताकतों द्वारा मनुवादी विचारधारा थोपने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका डटकर विरोध करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संत रैदास जैसे महान सामाजिक दार्शनिकों को याद करने का वास्तविक उद्देश्य इन्हीं घृणित ताकतों के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना है।
विचार गोष्ठी को असंगठित कामगार महासंघ के राज्य सचिव सुभाष कुमार, मितेश कुमार, प्रमिला देवी और विष्णु दास ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में सोम राज, रवि कुमार, जितेंद्र दास, सूरज पोद्दार, सरफराज, नसीर, विनोद, रंजन, सुमित, बबलू कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।













