


सैदपुर वाली मैया का महिमा अपरंपार
नवगछिया। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा देवी के 10 दिवसीय महापर्व शारदीय नवरात्र का आरंभ सोमवार से प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा से हुआ। इस अवसर पर नवगछिया अनुमंडल के गंगा तट से सटे सैदपुर गांव स्थित 108 फीट ऊंचे वैष्णवी दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
मंदिर की भव्यता और अलौकिक सौंदर्य दूर-दूर तक चर्चा का विषय है। नवनिर्मित भवन की दक्षिण भारतीय शैली में बनी स्तंभ और गुंबद की नक्काशी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। मंदिर की आंतरिक सजावट पर विशेष ध्यान दिया गया है और इसके गर्भगृह की साज-सज्जा अन्य राज्यों के कुशल कारीगरों द्वारा की गई है। करोड़ों की लागत से बना यह मंदिर अपने नक्काशी और भव्यता के कारण विशेष महत्व रखता है।
जानकारी के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना सन 1962 में सैदपुर के ग्रामीण ठीठर गोसाई की जमीन पर गोपालपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष बृजभूषण पांडे ने की थी। सन 2011 में ग्रामीणों की उपस्थिति में मंदिर अध्यक्ष महेश कुंवर के नेतृत्व में मंदिर निर्माण समिति का गठन किया गया। 5 मार्च 2012 को संत शिरोमणि नवगछिया शिव शक्ति योग पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आगमानंद महाराज के आगमन के बाद, उनके दिशा-निर्देश और ग्रामीणों के सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। इसके बगल में अब भव्य शिव मंदिर का भी निर्माण हो चुका है।
मंदिर में हर वर्ष शारदीय नवरात्र के अवसर पर कलश स्थापना, प्रतिमा स्थापना और मेला आयोजित किया जाता है। मेला समिति के अध्यक्ष ने बताया कि प्रथम पूजा के दिन से ही श्री राम कथा का रसपान शुरू हो गया है, जिसमें कथावाचक शंभूनाथ शास्त्री प्रवचन कर रहे हैं। मंदिर के पंडित रमन झा ने बताया कि प्रत्येक दिन दुर्गा सप्तशती पाठ और संध्या आरती होती है। वैष्णवी बलि के लिए यह मंदिर प्रख्यात है और प्रथम पूजा, निशा पूजा तथा नवमी के दिन विशेष वैष्णवी बलि दी जाती है।
सैदपुर के ग्रामीण नितेंद्र सिंह उर्फ गुलाब सिंह ने बताया कि वैष्णवी मंदिर की ख्याति बहुत दूर-दूर तक है और इसकी भव्यता अद्वितीय है। वहीं, ग्रामीण सुमन सिंह, आदित्य कुमार, पंकज सिंह और राघव झा ने बताया कि पूजा के साथ संध्या में कथा के बाद भजन-कीर्तन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। इस बार भी गंगा के पानी में मंदिर का अलौकिक विहंगम छंटा विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।














