



“सीता स्वयंवरं दृष्ट्वा रावणः क्रोधितोऽभवत्।
बाणासुरं च पृष्ट्वा तु, गर्जनं तेन संप्रयम्॥”
नवगछिया: बाजार स्थित बड़ी घाट ठाकुरबाड़ी प्रांगण में जय मां भवानी श्रीरामलीला मंडल, काशी वाराणसी विंध्याचल धाम (उत्तर प्रदेश) द्वारा आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव में सोमवार को लीला के तीसरे दिन ‘सीता स्वयंवर’ और ‘रावण-बाणासुर संवाद’ का मंचन किया गया। यह आयोजन 5 जुलाई से 13 जुलाई 2025 तक प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से 11 बजे तक हो रहा है, जिसका आयोजन नवगछिया में किया गया है।
लीला के अनुसार, राजा जनक के आमंत्रण पर विश्वामित्र मुनि के साथ श्रीराम और लक्ष्मण मिथिला पहुंचते हैं। दरबार में राम और लक्ष्मण के दिव्य स्वरूप को देख सभी उपस्थित राजा-महाराजा मोहित हो जाते हैं। उसी समय लंकापति रावण बिना निमंत्रण के स्वयंवर स्थल पर पहुंचता है। उसकी भव्यता और गर्व से भरी उपस्थिति को देख सभा में चर्चा होती है, तभी सभापति बाणासुर रावण से उसका परिचय पूछते हैं।

बाणासुर के प्रश्न से रावण क्रोधित हो उठता है और राजा जनक पर आरोप लगाता है कि उसे निमंत्रण नहीं भेजा गया। राजा जनक स्पष्ट करते हैं कि समुद्र पार लंका तक निमंत्रण भेजना संभव नहीं था। इस पर रावण आक्रोशित होकर कहता है कि यदि समुद्र में एक पाती भी डाल दी जाती, तो वह भी साहस न करता कि उसे लंका न पहुंचाए।
इसके पश्चात रावण सहित अनेक राजाओं ने शिव धनुष को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी उसे हिला न सका। राजा जनक चिंतित हो उठते हैं कि क्या पृथ्वी वीरों से विहीन हो गई है।
तभी विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम मंच पर आते हैं और सहजता से शिव धनुष को उठाकर तोड़ देते हैं। धनुष टूटते ही पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयकारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है। यह दृश्य भावुक और रोमांचित कर देने वाला रहा।
रामलीला मंचन में कलाकारों के अभिनय, संवाद अदायगी और पांडाल की सजावट ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों की भारी भीड़ ने पूरे आयोजन को भक्तिभाव से देखा और इस अनुपम लीला का आनंद लिया।
मौके पर संचालक स्वामी पुष्पेंद्र जी महाराज, व्यवस्थापक जितेंद्र कुमार व्यास पीठ का पन्नू लाल शास्त्री व अन्य उपस्थित थे ।














