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जलज परियोजना के तहत सांप संरक्षण और आजीविका पर दी गई जानकारी

नवगछिया अनुमंडल के प्रतापनगर कदवा गांव में मंगलवार को विश्व सांप दिवस के अवसर पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के तत्वावधान में जलज परियोजना के अंतर्गत सांपों के संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया।

इस अवसर पर जलज परियोजना की वरीय पदाधिकारी स्नेहा शर्मा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उसे मारें नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से छुड़वाने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि घटते जंगल और बढ़ती जनसंख्या के कारण विशेष रूप से रेंगने वाले जीवों (सरीसृपों) के आवासों में भारी कमी आई है। बरसात के मौसम में जब सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, तो वे भटक कर रिहायशी इलाकों में आ जाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी घर या मानव बस्ती में सांप दिखाई दे तो वन विभाग की टीम या गंगा प्रहरी रेस्क्यू टीम से संपर्क करें। ये टीमें सांप को सुरक्षित पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने का कार्य करती हैं।

जलज परियोजना के सहायक समन्वयक राहुल कुमार राज ने बताया कि हर साल 16 जुलाई को विश्व सांप दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी जागरूकता से हम न सिर्फ अपनी जान, बल्कि सांपों की जान भी बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान सांपों से सामना होने की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में घबराने के बजाय उन्हें सुरक्षित ढंग से हटवाना चाहिए।

फील्ड असिस्टेंट गौरव कुमार ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो बिना समय गंवाए तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। झाड़-फूंक और अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान हर्बल साबुन बनाने वाली महिला समूहों से व्यवसायिक विकास और आजीविका बढ़ाने के लिए चर्चा की गई। उन्हें कपड़े के थैले निर्माण व अन्य स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

अंत में सभी प्रतिभागियों ने जैव विविधता संरक्षण और सांपों की सुरक्षा के लिए सामूहिक शपथ ली। यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक पहल था, बल्कि ग्रामीण समुदाय के जीवनस्तर को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

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