5
(1)

भागलपुर के पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली को पत्र लिखकर मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के उद्देश्य से ईवीएम के स्थान पर बैलट पेपर प्रणाली पुनः लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पेपर आधारित मतदान प्रणाली अधिक उपयुक्त है।

अपने पत्र में अजीत शर्मा ने लिखा है कि 156-भागलपुर विधानसभा क्षेत्र से एक उम्मीदवार के रूप में वे चुनाव की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से संबंधित कई तकनीकी त्रुटियाँ, असंगतियाँ और विवाद सामने आए हैं, जिनसे चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे हैं। इसलिए चुनाव आयोग को चाहिए कि वह इन मुद्दों को गंभीरता से देखते हुए पारंपरिक बैलट पेपर प्रणाली को पुनः लागू करने पर विचार करे।

शर्मा ने अपने पत्र में 2024 लोकसभा चुनाव तथा वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ईवीएम से जुड़ी शिकायतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान बार-बार ऐसी रिपोर्टें आईं जिनमें ईवीएम में गड़बड़ी, वोटों की गिनती में असंगति और सुरक्षा को लेकर चिंताएं दर्ज की गईं।

अजीत शर्मा ने विशेष तौर पर 156-भागलपुर विधानसभा क्षेत्र के हालिया चुनाव का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मतदान 11 नवंबर को हुआ और मतगणना 14 नवंबर को राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, भागलपुर में की गई। मतगणना के दौरान कई बूथों के कंट्रोल यूनिट पर लिखे नंबर और फॉर्म 17-बी में दर्ज नंबर मेल नहीं खा रहे थे। काउंटिंग एजेंटों ने इस पर आपत्ति दर्ज की, जिससे लगभग आधे घंटे तक मतगणना प्रक्रिया रुकी रही, लेकिन बाद में मतगणना को बिना संतोषजनक समाधान के आगे बढ़ा दिया गया। उनके अनुसार यह घटना चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024 के चुनाव परिणामों के दौरान पोस्टल बैलट की प्राथमिकता को लेकर भी विवाद हुए और वीवीपीएटी स्लिप्स की जांच में पारदर्शिता की कमी की शिकायतें सामने आईं। इन सब कारणों से जनता और विपक्षी दलों में यह विश्वास पैदा हुआ कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष नहीं हैं।

अंत में अजीत शर्मा ने कहा कि बैलट पेपर प्रणाली में मतदाता स्वयं अपने वोट को स्पष्ट रूप से देख सकता है और गिनती की प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय, पारदर्शी और तकनीकी हस्तक्षेप से मुक्त होती है। यही कारण है कि लाखों लोग अब भी बैलट पेपर को अधिक विश्वसनीय मानते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि लोकतंत्र की मजबूती और मतदाताओं के विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए बैलट पेपर प्रणाली को फिर से लागू करने पर गंभीरता से विचार करे।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 1

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: