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नवगछिया : स्वतंत्रता दिवस के उल्लास के बीच भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल स्थित रंगरा प्रखंड के चापर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में देश की सीमा की रक्षा करते हुए दुश्मनों की घुसपैठ को नाकाम करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए बिहार रेजीमेंट के जवान अंकित कुमार का पार्थिव शरीर जब पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा गांव गम और गर्व की भावना से भर गया।

बाढ़ की विकट स्थिति के बावजूद सेना और प्रशासन के जवानों ने शहीद के पार्थिव शरीर को कंधों पर उठाकर गांव तक पहुंचाया। जैसे ही शव गांव में पहुंचा, “शहीद अंकित अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। गांव की गलियों से लेकर नदी किनारे तक लोग कतारबद्ध होकर तिरंगे में लिपटे अपने लाल को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में ग्रामीण, युवा, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। गांव की महिलाएं भी हाथों में दीप और फूल लिए विदाई देने पहुंचीं। आंखें नम थीं लेकिन चेहरों पर अपने गांव के बेटे पर गर्व झलक रहा था।

पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद अंकित कुमार का अंतिम संस्कार किया गया। भागलपुर के प्रभारी मंत्री संतोष कुमार भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने शहीद के परिजनों को बिहार सरकार की ओर से 21 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। इस दौरान उन्होंने कहा कि अंकित कुमार जैसे वीरों के कारण ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और पूरा राष्ट्र उनके बलिदान को नमन करता है।

अंकित कुमार वर्ष 2009 में बिहार रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। उनके परिवार में तीनों भाई सेना की सेवा कर चुके हैं। एक महीने पहले ही वह छुट्टी बिताकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। वे अपने पीछे पत्नी, दो छोटे बेटे, माता-पिता और पूरा परिवार छोड़ गए।

परिजनों और गांववालों ने सरकार से अपील की कि देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों के सम्मान में न सिर्फ नीतियों को और सख्त किया जाए, बल्कि दुश्मन देशों को कड़ा संदेश दिया जाए ताकि भविष्य में कोई भारत की ओर आंख उठाकर देखने की हिम्मत न कर सके।

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