



कोसी और गंगा की भीषण बाढ़ पर भारत-नेपाल स्तर पर जारी संवाद
भागलपुर जिले में बाढ़ सुरक्षा और कटाव रोकने को लेकर सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा 18 व 19 अगस्त को भेजे गए पत्रों पर केंद्र सरकार ने अपना आधिकारिक जवाब भेज दिया है। जल संसाधन मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बाढ़ संरक्षण योजनाओं का निर्माण और उनका क्रियान्वयन मुख्यतः राज्य सरकारों का विषय है, जबकि केंद्र सरकार गंभीर और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन आधारित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।

18 अगस्त के पत्र में उल्लेखित परियोजना पर कार्रवाई का हवाला देते हुए मंत्रालय ने बताया है कि प्रस्तावित योजना को गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग द्वारा तकनीकी और आर्थिक मूल्यांकन के उपरांत केंद्रीय जल आयोग की सलाहकार समिति की आगामी बैठक में शामिल करने के लिए भेज दिया गया है। वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार इस परियोजना पर आगे की प्रक्रिया जारी है।
इसके अलावा, सांसद द्वारा 19 अगस्त को भेजे गए पत्र में कोसी और गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ और निरंतर हो रहे कटाव की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। इस पर मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि उत्तरी बिहार की नदियाँ, विशेषकर कोसी, नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होने पर अचानक बढ़े हुए जलप्रवाह के कारण गंभीर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करती हैं।

मंत्रालय ने आगे बताया कि भारत और नेपाल के बीच बाढ़ नियंत्रण तथा जल प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर निरंतर संवाद जारी है। इसके लिए त्रि-स्तरीय द्विपक्षीय तंत्र—जल संसाधन पर संयुक्त मंत्रिस्तरीय समिति, जल संसाधन पर संयुक्त समिति और संयुक्त स्थायी तकनीकी समिति—के माध्यम से नियमित बैठकें होती रहती हैं।
भारत सरकार नेपाल के साथ सप्तकोसी और सन-कोसी नदियों पर बहुउद्देशीय बांध निर्माण संबंधी प्रस्तावों पर सतत वार्ता कर रही है। इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए 2004 से विराटनगर में संयुक्त परियोजना कार्यालय कार्यरत है, जो दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रहा है।
















