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भागलपुर एसीजेएम कोर्ट में न्यायाधीश धर्मेंद्र पांडेय की अदालत ने एक दशक पुराने चर्चित मामले में कहलगांव के पूर्व विधायक पवन यादव समेत कुल 21 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बा-इज्जत बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से सभी आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।

यह मामला कहलगांव अनुमंडल के एनटीपीसी थाना कांड संख्या 14/16 से जुड़ा है। मामले में एनटीपीसी के तत्कालीन महाप्रबंधक टी. गोपाल कृष्णा की लिखित शिकायत पर पुलिस ने पूर्व विधायक पवन यादव सहित 21 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया था।

शिकायत के अनुसार, 7 अप्रैल को सुबह लगभग 10 बजे एस डाइक लैगून 3डी क्षेत्र अंतर्गत मजदाहा गांव में जल निकासी के लिए नाले का निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान मजदाहा गांव निवासी मनकी देवी, गिरीश मंडल, मिथिलेश मंडल, पूनम देवी, ज्योति देवी, प्रभु मंडल, बीरेंद्र मंडल समेत 15 से 20 लोग लाठी-डंडे से लैस होकर मौके पर पहुंचे। आरोप था कि सभी लोग पूर्व विधायक पवन यादव को अपना नेता बताते हुए ठेकेदारी देने की मांग करने लगे, गाली-गलौज किया, प्रशासन के विरोध में नारेबाजी की और पांच लाख रुपये रंगदारी की मांग करते हुए निर्माण कार्य को बाधित कर दिया।

पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की आठ धाराओं के तहत पवन यादव समेत 21 लोगों को अभियुक्त बनाया था। जांच के दौरान गिरीश मंडल, सनातन मंडल, 70 वर्षीय सावित्री देवी और 90 वर्षीय तारा देवी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में सभी को जमानत मिल गई थी। इस दौरान तारा देवी का निधन भी हो गया।

लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को आरोप सिद्ध करने का पूरा अवसर दिया, लेकिन कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसी आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

कोर्ट से बरी होने के बाद पूर्व विधायक पवन यादव ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था और आज वही भरोसा सच साबित हुआ। उन्होंने कहा कि जो दोषी हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने एनटीपीसी क्षेत्र के आसपास बसे सैकड़ों ग्रामीणों की स्वास्थ्य समस्याओं और राख से हो रहे नुकसान का भी मुद्दा उठाया और सरकार से स्थायी समाधान की मांग की।

मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता हिमांशु शेखर ने कहा कि उनके मुवक्किलों को साजिश के तहत झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीपीसी द्वारा गलत तरीके से नाला निर्माण कराया जा रहा था, जिसे गांव के लिए विनाशकारी बताते हुए ग्रामीणों ने आंदोलन के रूप में रोका था। लेकिन पुलिस ने गलत अनुसंधान कर सभी को अभियुक्त बना दिया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके कारण सभी आरोपियों को बरी किया गया।

इस फैसले के बाद कहलगांव क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और पूर्व विधायक समर्थकों में संतोष और राहत की भावना देखी जा रही है।

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