



टेपर्स और विक्रेताओं की आजीविका में आएगा सुधार
भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने नीरा टेपर्स और विक्रेताओं की आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय परिसर में नीरा प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर ताड़ी टेपर्स, विश्वविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रेस और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डॉ. सिंह ने बताया कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर देश की पहली संस्था है जिसने पल्मीरा नीरा प्रसंस्करण में तकनीक विकसित की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से नीरा के संरक्षण और सुरक्षित प्रसंस्करण की दिशा में कार्य कर रहा है। यह इकाई प्रति घंटे 100 लीटर नीरा प्रसंस्करण की क्षमता रखती है।
उन्होंने बताया कि बिहार में 90 लाख से अधिक पाम के पेड़ हैं, जिनका पूर्ण उपयोग कर राज्य में नीरा आधारित उद्यमिता, रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पाश्चुरीकरण, कैनिंग और नीरा पाउडर जैसे नवाचारों पर काम कर रहा है जिससे नीरा को सुरक्षित रूप में लंबे समय तक संरक्षित किया जा सकता है।

डॉ. वसीम सिद्दीकी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने नीरा से जुड़ी कई नवीन तकनीकों का विकास किया है। इसमें नीरा पाउडर तैयार करने की तकनीक भी शामिल है, जिसे पानी में घोलकर ताजे नीरा जैसा स्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
डॉ. अहमर आफ्ताब, डॉ. शमशेर अहमद और डॉ. विवेक कुमार ने भी इस तकनीकी विकास में अहम भूमिका निभाई है। डॉ. वसीम सिद्दीकी ने बताया कि प्रसंस्करण इकाई की सुविधाएं समुदाय आधारित संरक्षण कार्यों के लिए भी उपलब्ध रहेंगी।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना के तहत इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। विश्वविद्यालय ने उच्च गुणवत्ता वाले नीरा संग्रहण के लिए नीरा संग्रहण बॉक्स और पॉलीबैग का डिजाइन तैयार कर उसका पेटेंट भी करवाया है।
नीरा प्रसंस्करण इकाई का यह उद्घाटन बिहार में नीरा उद्योग के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे न सिर्फ नीरा टेपर्स की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि राज्य में ग्रामीण रोजगार और उद्यमिता को भी नई दिशा मिलेगी।













