


भागलपुर। अंग प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आस्था का प्रतीक लोक पर्व बिहुला–विषहरी पूजा हर्ष और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। सदियों पुरानी यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और लोक संस्कृति का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है।
अंतिम दिन मां मनसा देवी की प्रतिमा का नैमित्तिक विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने नम आंखों और गगनभेदी जयकारों के बीच माता को विदाई दी। गांव से लेकर शहर तक भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी। महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से उत्साहित दिखे और माता से परिवार की सुख-समृद्धि तथा रक्षा का आशीर्वाद मांगा।
भागलपुर स्टेशन चौक पर विश्व हरि महासभा की ओर से भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इसमें शांति समिति के सदस्य, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
जिला प्रशासन की ओर से पर्व को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए। वरीय पुलिस अधीक्षक, सीटीएसपी, यातायात डीएसपी सहित सभी थाना प्रभारियों और पुलिस बल को तैनात किया गया था। चौक-चौराहों पर कड़ी निगरानी रखी गई, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ में किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
लोगों का मानना है कि विषहरी माता की पूजा से गांव और शहर में शांति, सुरक्षा और समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि श्रद्धालु हर वर्ष इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस बार भी पूरे जिले में भक्तों का उत्साह चरम पर देखने को मिला।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहुला–विषहरी पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति का ज्वलंत उदाहरण भी है। यह पर्व भाईचारे, एकजुटता और सामूहिक सहभागिता का संदेश देता है।
अंग प्रदेश की इस धरोहर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोक पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के साथ-साथ समाज को जोड़ने का कार्य भी करते हैं। शांति और सद्भावना के बीच सम्पन्न हुए इस पर्व ने यह संदेश दिया कि विषहरी माता की पूजा आस्था और परंपरा से आगे बढ़कर सामाजिक एकता और मानवता की मिसाल है।












