



भागलपुर स्टेशन चौक स्थित श्री जैन श्वेतांबर मंदिर में पर्युषण महापर्व में भगवान महावीर जन्म वाचन महोत्सव बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर की माता त्रिशला को गर्भ में आने से पूर्व देखे गए 14 स्वप्नों की बोलियां लगाई गईं, जिसमें धर्म प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

जन्मोत्सव के दौरान बाल प्रभु महावीर को पालने में झुलाया गया तथा भजन संध्या का आयोजन किया गया। विनोद दूगड़ ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व त्याग और तप का पर्व है। इस दौरान आत्मा की अज्ञानता को दूर करना, आठ कर्मों का दहन करना और जीव मात्र के प्रति दया भावना रखना ही सच्चा धर्म है।
श्वेतांबर परंपरा के अनुसार भाद्रपद कृष्ण द्वादशी या त्रयोदशी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी या पंचमी तक अष्ट दिवसीय साधना के रूप में पर्यूषण पर्व मनाया जाता है। इस दौरान जैन धर्मावलंबी धर्मग्रंथों का पाठ करते हैं, प्रवचन सुनते हैं, दान-पुण्य के कार्य करते हैं और व्रत का पालन करते हैं। चातुर्मास के दिनों में पशु हिंसा से बचने और आहार-विहार में विशेष संयम रखने पर जोर दिया जाता है।

दोपहर 3 बजे रायपुर, छत्तीसगढ़ से आईं सुश्री शालिनी पारेख और सुश्री सरला बुरार ने प्रभु जन्म वाचन का पाठ किया। इसके बाद स्वामी वात्सल्य का कार्यक्रम हुआ। संध्या भक्ति और भव्य आरती के साथ भगवान महावीर जन्म वाचन महोत्सव का समापन हुआ।
इस अवसर पर अध्यक्ष तरुण सहला, मंत्री प्रभाकर सिंह जैन, रविन्द्र सिंह जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तजनों में विवेक दूगड़, प्रभात सिंह जैन, पंकज कुमार जैन, गौरव जैन, ममता भांडिया, तपन साहेला, दिनेश मटालिया, शरद दूगड़, अलका दूगड़, अंजू जैन और प्रतिमा भांडिया की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।













