



नवगछिया : देवोत्थान एकादशी (देवउठनी एकादशी) के अवसर पर भगवान श्रीहरि विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दिन चातुर्मास का समापन हुआ और मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार, यह माना जाता है कि जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु चार महीनों की योगनिद्रा के बाद इस दिन जागते हैं।

शास्त्रों में वर्णित है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवप्रबोधिनी एकादशी मनाई जाती है, जब भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही सृष्टि के कार्यों का आरंभ होता है। इस दिन श्रद्धालुओं ने व्रत, पूजा और भगवान की आराधना कर मंगलकामनाएं कीं।

गोपालपुर नवटोलिया के पंडित मृत्युंजय झा और पंडित अशोक झा ने बताया कि देवउठनी एकादशी के बाद से विवाह, उपनयन (जनेऊ), मुंडन सहित अन्य सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। हालांकि इस वर्ष मिथिला पंचांग के अनुसार विवाह मुहूर्त सामान्य से कुछ विलंब से प्रारंभ हो रहे हैं।
पूरे क्षेत्र में इस अवसर पर धार्मिक उल्लास और आस्था का माहौल देखने को मिला।
















