


भागलपुर के पटल बाबू रोड स्थित एक होटल में 18 सितम्बर को शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार सिंह के सम्मान में अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। हाल ही में उन्हें ऑक्सफोर्ड में विश्व स्तरीय सम्मान “बेस्ट कम्युनिटी अवार्ड” से नवाजा गया है। इस अवसर पर नवगछिया, नाथनगर और कहलगांव के दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
समारोह में डॉ. अजय सिंह ने अपने जीवन और मेडिकल कॉलेज के दिनों की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन से ही वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। 1988 में आए भूकंप के दौरान छतिग्रस्त भवन पर चढ़कर उन्होंने अपने साथियों की जान बचाई थी। इसके अलावा मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने बिहार सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी।
इस मौके पर कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। नाथनगर के टिंकू ने कहा कि जितना सामाजिक कार्य एक डॉक्टर होते हुए डॉ. अजय सिंह करते हैं, उतना उदाहरण पूरे बिहार में नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि लंदन ने तो बेस्ट कम्युनिटी अवार्ड अभी दिया है, लेकिन हमलोगों ने उन्हें अरसे पहले ही दिल से यह सम्मान दे दिया था।
बाबुल विवेक ने कहा कि डॉ. अजय सिंह ने भागलपुर में कदम रखते ही गंभीर रूप से बीमार बच्चों के जीवन रक्षक का काम किया। उन्होंने लगातार नए उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर नवजात शिशुओं और बच्चों की जान बचाई। यही कारण है कि यह सम्मान भागलपुरवासियों के लिए गर्व की बात है।
कहलगांव से आए नितिन ने कहा कि डॉ. सिंह की सेवा भावना और दीवानगी का कोई पैमाना नहीं है। वे बटेश्वर स्थान कहलगांव में डूबने से बचाने की मुहिम भी चला रहे हैं। नवगछिया से आए कई लोगों ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।
संतोष गुप्ता ने जोशीले अंदाज में कहा कि अभी तो उन्होंने सिर्फ दो गज जमीन नापी है, अभी पूरा आसमान बाकी है। उन्होंने “हम होंगे कामयाब” गीत गाकर माहौल को ऊर्जा से भर दिया। वहीं एन.पी. सिंह ने बताया कि भागलपुर में डॉ. सिंह द्वारा बचाया गया पहला मरणासन्न नवजात बच्चा उन्हीं के द्वारा लाया गया था। उस समय किसी को विश्वास नहीं था कि बच्ची बचेगी, लेकिन उनकी निष्ठा और दृढ़ संकल्प ने असंभव को संभव कर दिखाया।
मंच संचालन क्लीन नवगछिया ग्रीन नवगछिया के अध्यक्ष चंद्रगुप्त साह जोरके ने किया।
अंत में डॉ. अजय सिंह ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका कोई लक्ष्य या मंजिल नहीं है, बस नेकी के रास्ते पर चलना और आजीवन चलते रहना ही उनकी सबसे बड़ी इच्छा है।












