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भागलपुर। 1974 के जेपी आंदोलन के सेनानी, वरिष्ठ समाजसेवी और भागलपुर नगर पालिका के पूर्व वार्ड कमिश्नर 78 वर्षीय वीरेंद्र नारायण सिंह ‘मनोज़’ का आज सुबह हृदय गति रुकने से अचानक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से भागलपुर शहर में गहरा शोक फैल गया। सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले मनोज़ को हर वर्ग में एक ईमानदार, सरल और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में जाना जाता था।

मनोज़ जीवनभर सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे। जेपी आंदोलन के दौरान उनकी सक्रिय भूमिका को आज भी शहर के लोग याद करते हैं। वार्ड कमिश्नर के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को आगे बढ़ाया और जनता के बीच एक विश्वसनीय जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान बनाई।

उनके निधन की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। लोग उन्हें मिलनसार, सरल और सदैव जनहित में तत्पर रहने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद कर रहे हैं।

परिवार के अनुसार मनोज़ अपने पीछे पुत्र मोहित सिंह, दो बड़ी पुत्रियाँ और पत्नी को छोड़ गए हैं। अंतिम यात्रा कल सुबह 11 बजे निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

मनोज़ का नाम ‘माइकल’ कैसे पड़ा – जानिए रोचक कहानी
मनोज़ के पुत्र मोहित सिंह ने बताया कि उनके पिता को ‘माइकल’ नाम फिल्म ‘मजबूर’ के अभिनेता प्राण के किरदार से मिला। फिल्म में प्राण का अनोखा अंदाज—अपनी आंखों के सामने हाथ रखकर देखने का तरीका—लोगों को बेहद पसंद आया था।

भागलपुर के उस समय के कोतवाली इंस्पेक्टर राम नरेश सिंह ने मजाकिया अंदाज में मनोज़ को ‘माइकल’ कहना शुरू किया। देखते ही देखते यह नाम पूरे शहर में लोकप्रिय हो गया और लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘माइकल’ के नाम से बुलाने लगे।

इस तरह ‘मनोज़’ और ‘माइकल’ दोनों नाम उनके व्यक्तित्व, पहचान और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए।

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