



समापन समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं
भागलपुर। महिला संवाद कार्यक्रम के दौरान गांव-गांव से निकली महिलाओं की आवाज़ अब कई नीतिगत निर्णयों की नींव बन रही है। महिला संवाद के समापन अवसर पर पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांगों को गंभीरता से लेते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन की राशि को वर्तमान 400 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1100 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की। यह फैसला महिला संवाद के दौरान आई प्रमुख मांगों में से एक पर लिया गया है। साथ ही, जीविका स्वयं सहायता समूहों को बैंक से मिलने वाले ऋण पर ब्याज दर को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे समूहों को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रत्येक पंचायत में सामुदायिक विवाह भवन का निर्माण कराया जाएगा। यह निर्णय महिला संवाद के दौरान सामूहिक रूप से उठाई गई एक और प्रमुख मांग के आलोक में लिया गया है।

इसके अतिरिक्त, सामुदायिक संगठन से जुड़े कैडरों के मानदेय में दो गुना बढ़ोतरी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रत्येक प्रखंड कार्यालय में ‘जीविका दीदी की रसोई’ शुरू की जाएगी, जिससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और सम्मानजनक आजीविका के अवसर मिल सकें।
महिला संवाद की इस समीक्षात्मक बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों से आई महिलाओं से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं, सुझावों और अनुभवों को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी और सुझाव राज्य की नीतियों को जनहितैषी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस बैठक से पूर्व भागलपुर जिला समाहरणालय स्थित समीक्षा भवन में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने जिले भर से आई जीविका दीदियों के साथ संवाद किया और महिला संवाद कार्यक्रम को लेकर उनके अनुभव तथा अपेक्षाएं जानीं।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन, अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं सभी 16 प्रखंडों से जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ की अध्यक्ष और सचिव दीदियाँ मौजूद रहीं।
महिलाओं ने बताया कि महिला संवाद के तहत गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं, जिनमें जीविका समूह की सदस्याओं के साथ-साथ अन्य महिलाएं भी थीं। इन संवादों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का अवसर मिला, जो अब योजनाओं के रूप में साकार हो रहा है।













