



पत्नी ने तोड़ा मंगलसूत्र, मासूम बेटों ने दी मुखाग्नि, पूरे गांव में छाया मातम
नवगछिया – जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात बिहार रेजीमेंट के वीर जवान अंकित यादव उर्फ धीरज यादव की शहादत की खबर 13 अगस्त को जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। स्वतंत्रता दिवस के दिन उनका पार्थिव शरीर जब नवगछिया के जीरोमाइल चौक पर पहुंचा, तो हजारों की संख्या में उमड़ी युवाओं की टोली ने ‘शहीद अमर रहें’ के नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए काफिले का स्वागत किया।

शहीद का पार्थिव शरीर नवगछिया होते हुए पैतृक गांव लाया गया। रास्ते भर चौक-चौराहों पर लोग तिरंगा लेकर खड़े थे और हर तरफ देशभक्ति के नारे गूंज रहे थे। गांव पहुंचने से पहले बाढ़ के कारण सेना और परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन बाधाओं के बावजूद तिरंगे में लिपटा वीर सपूत अपने घर पहुंचा।
घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। पत्नी ने जैसे ही तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखा, खुद ही अपना मंगलसूत्र तोड़ दिया और बदहवास होकर गिर पड़ी। यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। चार वर्षीय पुत्र उत्कर्ष और उपांशु ने अपने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया।

राजकीय सम्मान के साथ सेना के अधिकारियों ने शहीद को अंतिम सलामी दी। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, सेना के जवान, ग्रामीण, युवा और परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव की गलियों से लेकर हर कोने तक मातम पसरा रहा, लेकिन साथ ही शहीद की बहादुरी पर गर्व भी था।
शहीद अंकित यादव की अंतिम यात्रा सिर्फ एक जवान की विदाई नहीं थी, बल्कि वह एक पूरे राष्ट्र के सम्मान और बलिदान की मिसाल बन गई।














