



नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सोमवार रात लगभग 11 बजे भवानीपुर निवासी 60 वर्षीय अनिता देवी, पति अशोक पासवान को हार्ट अटैक की आशंका के बाद इमरजेंसी में लाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इस दौरान अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
परिजनों ने बताया कि वे कई बार आवाज देते रहे, लेकिन कोई नहीं आया। मरीज की हालत बिगड़ती देख उन्होंने 112 नंबर डायल कर पुलिस को बुलाया। सुरक्षा गार्ड ने भी पुलिस को सूचित किया। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद ही डॉक्टर अस्पताल पहुंचे और प्राथमिक इलाज कर मरीज को मायागंज मेडिकल कॉलेज भागलपुर रेफर किया गया।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में आपात स्थिति में भी न तो डॉक्टर होते हैं और न ही स्वास्थ्यकर्मी। चिकित्सक कहीं अन्यत्र व्यस्त रहते हैं और मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।
इस पूरे मामले में परिजनों ने अस्पताल की लापरवाही का वीडियो भी वायरल किया है, जिसमें अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल और परिजनों की नाराजगी साफ देखी जा सकती है।

हालांकि, मामले को लेकर नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पिंकेश कुमार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में डॉक्टर अफजल मौजूदा समय में ड्यूटी पर थे और वे खुद भी अस्पताल में अपने कक्ष में उपस्थित थे।
डॉ. कुमार ने कहा कि मरीज को ऑक्सीजन लगाकर परिजनों की मौजूदगी में ही मायागंज रेफर किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि मंगलवार को अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और रिकॉर्ड डेट की जांच की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन, कब और कहां मौजूद था।
फिलहाल अनिता देवी की स्थिति काफी नाजुक बताई जा रही है। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।














