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नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत गौशाला रोड स्थित एक निजी क्लिनिक “स्नेहा बेबी केयर सेंटर” पर नवजात शिशु बदलने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने क्लिनिक पर हंगामा किया। साथ ही, स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खगड़िया जिले के गोगरी थाना क्षेत्र के बासुदेवपुर शिशवा गांव निवासी खुशबू देवी, पति सुमन कुमार, ने 17 अक्टूबर को अपने नवजात शिशु को इलाज के लिए स्नेहा बेबी केयर सेंटर में भर्ती कराया था। क्लिनिक प्रबंधन ने शिशु को पीलिया (जॉन्डिस) से पीड़ित बताकर भर्ती कर लिया। रविवार 19 अक्टूबर को, शिशु की स्थिति गंभीर बताकर मौखिक रूप से उसे भागलपुर रेफर कर दिया गया।

खुशबू देवी की मां रंजू देवी के अनुसार, रविवार की सुबह लगभग 4 बजे क्लिनिक से फोन आया कि बच्चे की हालत गंभीर है। जब परिजन सुबह 5 बजे क्लिनिक पहुंचे, तो उन्हें एक मृत शिशु कपड़े में लपेटकर सौंप दिया गया और जल्दबाजी में एक निजी गाड़ी बुलाकर रवाना कर दिया गया। भागलपुर पहुंचने पर परिजनों को संदेह हुआ कि मृत शिशु उनका नहीं है।

परिजनों का कहना है कि मृत शिशु के हाथों, पैरों और सिर पर तिलक किया गया था और पैर की उंगली पर लाल अल्ता लगा हुआ था, जो जन्म के बाद पारंपरिक धार्मिक या सांस्कृतिक अनुष्ठानों के दौरान किया जाता है। जबकि उनके नवजात शिशु के साथ ऐसा कोई अनुष्ठान नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त, जिस गाड़ी से भागलपुर भेजा गया, उसका किराया भी नहीं लिया गया। इन सभी बातों के आधार पर परिजनों को शक है कि क्लिनिक ने जानबूझकर उनका बच्चा बदल दिया है।

घटना की जानकारी मिलते ही नवगछिया थाना के पुअनि अजीत कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत कराया। परिजनों ने प्रशासन से न्याय की मांग की है और क्लिनिक संचालक पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

नवगछिया अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पिंकेश कुमार ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और जांच की जा रही है। पीड़ित द्वारा मौखिक आरोप लगाए गए हैं, लेकिन यह देखा जाएगा कि उनके पास क्या लिखित साक्ष्य और तथ्य मौजूद हैं। वहीं, अवैध रूप से संचालित क्लिनिकों और फर्जी डॉक्टरों के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

भागलपुर के सिविल सर्जन से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

नवगछिया थानाध्यक्ष रविशंकर सिंह ने बताया कि क्लिनिक में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई है, लेकिन जांच में नवजात बदलने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि शिशु के शव के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यदि पीड़ित की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त होता है तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर अवैध रूप से संचालित निजी क्लिनिकों और फर्जी चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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