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नवगछिया। नवगछिया के तेतरी निवासी शशिभूषण चौधरी के पुत्र आदित्य आनंद ने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (सीडीएस-1) 2025 में सफलता प्राप्त कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया है। आदित्य आनंद का ऑल इंडिया रैंक 225 रहा है। अब उनकी नियुक्ति ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), चेन्नई में लेफ्टिनेंट के पद पर होगी।

आदित्य आनंद की इस उपलब्धि से उनके परिवार सहित पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। पिता शशिभूषण चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि अब तक लोग उन्हें उनके नाम से जानते थे, लेकिन अब लोग उन्हें एक लेफ्टिनेंट के पिता के रूप में पहचानेंगे। वहीं मां ममता देवी ने कहा कि उनका सपना था कि बेटा एक बड़ा पदाधिकारी बने, जिसे आदित्य ने पूरा कर दिखाया है।

अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए आदित्य आनंद ने कहा कि शुरुआती असफलताओं से छात्रों को घबराना नहीं चाहिए। निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ तैयारी करने पर सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने बताया कि तीन बार लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद अंतिम चयन नहीं हो पाया, लेकिन चौथी बार में उन्हें सफलता मिली। उन्होंने कहा कि असफलता के बाद मिलने वाली सफलता की खुशी सबसे अधिक होती है।

आदित्य आनंद की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, एपीएससी, सीबीएसई बोर्ड, बरौनी से हुई। इंटरमीडिएट की पढ़ाई उन्होंने सेंट पॉल स्कूल, तेघड़ा से की। इसके बाद स्नातक की परीक्षा नालंदा ओपन विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की, जिसमें उनका ऑनर्स विषय भूगोल रहा। बचपन से ही उनका सपना था कि वे सेना में अधिकारी बनें और देश की सेवा करें।

तैयारी के बारे में उन्होंने बताया कि वे घर पर रहकर ही पढ़ाई करते थे। शुरुआती दौर में रोजाना 10 से 12 घंटे अध्ययन करते थे। सिलेबस पूरा होने के बाद प्रतिदिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई जारी रखते थे। जो विषय समझ में नहीं आते थे, उनके लिए यूट्यूब से सहायता लेते थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम से दूरी बनाए रखी, ताकि ध्यान भटकने से बचा रहे।

आदित्य आनंद की इस सफलता में उनके बड़े भाई अतुल आनंद, बहन एकता आनंद और जीजा श्याम चंद्र का विशेष योगदान रहा। जीजा श्याम चंद्र सरकारी सेवा में कार्यरत रहे हैं, जिनसे उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और प्रेरणा मिली। वहीं भाई अतुल आनंद वर्तमान में यूपीएससी और बीपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।

आदित्य आनंद की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि नवगछिया और भागलपुर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।

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