



नवगछिया में पति और पुत्र की दीर्घायु तथा घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर मनाया जाने वाला डोरा पर्व पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और नियम-निष्ठा के साथ संपन्न हो रहा है। मंगलवार 4 मार्च से आरंभ हुआ यह व्रत लगातार सात सप्ताह तक प्रत्येक रविवार को किया जाएगा। अंतिम दिन डोरा विसर्जन के साथ पर्व का विधिवत समापन होगा।
व्रती महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की मंगलकामना करती हैं। पूजा के दौरान डोरा अर्थात पवित्र धागा बांधकर व्रत का संकल्प लिया जाता है, जिसे सातवें रविवार तक पूरी निष्ठा और नियमपूर्वक निभाया जाता है। व्रत के दौरान सात्विक आहार, संयम और धार्मिक अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है।

डोरा पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा का वाचन
नवगछिया नगर परिषद क्षेत्र के सिमरा वार्ड संख्या 06 में कथावाचिका पूर्णिया देवी द्वारा डोरा पर्व से संबंधित पौराणिक कथा का वाचन किया गया। कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार अत्यंत कष्टमय जीवन व्यतीत कर रहा था। ब्राह्मण की पत्नी ने अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ सूर्य देव की आराधना करते हुए डोरा व्रत का पालन किया।
लगातार सात रविवार तक कठोर नियमों के साथ व्रत करने पर सूर्य देव प्रसन्न हुए और उसके परिवार को सुख-समृद्धि, संतानों की लंबी आयु तथा आर्थिक संपन्नता का आशीर्वाद प्रदान किया। मान्यता है कि तभी से यह व्रत परिवार की रक्षा, उन्नति और कल्याण के लिए किया जाता है। यह कथा सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा, संयम और विश्वास के साथ की गई आराधना से हर मनोकामना पूर्ण हो सकती है।

सामूहिक पूजा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नवगछिया अनुमंडल के सिमरा गांव में विधि-विधान के साथ सामूहिक पूजा-पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। सामूहिक पूजा-अर्चना में निर्मला देवी सहित कुल पांच महिलाएं मुख्य रूप से शामिल रहीं, जबकि मौके पर दर्जनों ग्रामीणों की उपस्थिति रही।
ग्रामीण अंचलों में डोरा पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पारिवारिक एकता, नारी समर्पण और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
















